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कोरोना से लड़ने में कारगर दो दवाएं बना चुके हैं अलीगढ़ के डा. अशोक

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डॉ. अशोक कुमार। - फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम, अलीगढ़।
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कोरोना के इस संकट काल में पूूरी दुनिया में तेजी से नई दवाएं इजाद हो रही हैं, ताकि इस जानलेवा महामारी को मात दी जा सके। हाल ही में अमेरिका ने रेमडेसिविर नाम की दवा का प्रयोग कर कोरोना मरीजों को कुछ हद तक सुधारने की अवधि को 15 से घटा कर 11 दिन कर लिया। वहां के औषधि प्रशासन विभाग ने इस दवा को उपयोगी बताया है। चीन, स्काटलैंड सहित अन्य देशों में कैंसर, अस्थमा सहित अन्य बीमारियों की दवाओं को कोरोना के इलाज में प्रयोग किया जा रहा है। ये अधिकांश दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और सांस की दिक्कत दूर करने वाली है। ऐसी ही बेहद कारगर दो दवाएं अलीगढ़ में भी विकसित हो चुकी हैं। इनको अलीगढ़ निवासी डा. अशोक ने इजाद किया है। अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी के गेस्ट फैकल्टी डा. अशोक इन दिनों अमेरिका के टेक्सास प्रांत में है, लॉकडाउन के चलते वह स्वदेश नहीं लौट पा रहे हैं, लेकिन वह प्रयासरत हैं कि जल्द से जल्द अलीगढ़ आएं और अपनी दोनों दवाओं को कोरोना के मरीजों को उपलब्ध करा सकें।
फोन पर उन्होंने बताया कि कोरोना के इलाज में बेहद कारगर एसकेवी 108 और एसकेवी ओएम नाम की दो दवाएं उन्होंने बनाई थीं। ये दवाएं सार्स नाम की वायरस से संबंधित बीमारी फैलने के बाद बनाई गई थीं। जिसमें एसकेवी 108 का वर्ष 2014 में अमेरिका से पेटेंट कराया गया है। एसकेवी 108 शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। जिससे वायरस इंफेक्शन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर सहित कई बीमारियों में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता तेजी बढ़ती है, जिसके बाद रोगी कम से कम दवाओं में ठीक होता है। इससे शरीर को नई ऊर्जा मिलती है, इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है क्योंकि ये पूरी तरह से स्वदेशी दवा है। ये दवा दिन में तीन बार दी जाती है। जिससे इसका संपूर्ण लाभ होता है। मरीज के ठीक होने के बाद इसको बंद कर दिया जाता है।
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इसी तरह से एसकेवी ओएम नाम की दवा (ब्रोंको डायलेटर) से सांस लेने संबंधी समस्या दूर होती है। डा. अशोक ने बताया कि दोनों दवाएं पूर्ण रूप से स्वदेशी हैं। दोनों दवाएं पूर्व में ही कई वर्ष तक क्लीनिक ट्रायल से गुजर चुकी हैं। शोध के स्तर पर इसका उत्पादन भी हो चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में लाखों मरीजों के लिए इसका व्यवसायिक उत्पादन नहीं हुआ है। इन दोनों दवाओं को लेकर अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी में भी नये सिरे से कोरोना मरीजों पर प्रयोग करने पर विचार हो रहा है। संकटकाल में उम्मीद है कि भारत सरकार इन दवाओं पर ध्यान दे और उत्पादन शुरू हो सके। जिससे हमारे देश के साथ ही पूरी दुनिया को मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही स्वदेश लौटेंगे और इन दवाओं से लोगों को राहत पहुंचाने में लगेंगे। बोले.. इन दवाओं के प्रयोग से शरीर को ऊर्जावान कर कोरोना से बहुत जल्द ही निजात भी पाई जा सकती है।
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