पूर्व विधायक डॉ. अनवार खां कई चुनाव हारे जरूर, लेकिन उनकी शख्सियत इतनी बड़ी थी कि इंदिरा गांधी से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक छह प्रधानमंत्री उनको नाम और चेहरे से बखूबी पहचानते थे।
अतरौली से डॉ. अनवार खां एक बार विधायक और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे, उन्हें छह प्रधानमंत्री - इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह नाम और चेहरे से बखूबी पहचानते थे।
राजनीतिक सफर
-डॉ. अनवार खां का राजनीतिक सफर - 1957 में नगर पालिका सभासद के रूप में सियासी पारी की शुरुआत, लगातार 20 साल तक सभासद रहे।
- 1974 में बीकेडी के टिकट पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, जनसंघ के कल्याण सिंह से कुछ वोटों से हारे।
- 1977 में फिर बीकेडी से लड़े।
- 1980 में कांग्रेस के टिकट पर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री कल्याण सिंह को हराकर पहली बार विधायक बने।
- 1980 से 1989 तक यूपी टेक्सटाइल प्रिंटिंग कॉर्पोरेशन के उपाध्यक्ष, यूपी ब्रासवेयर के चेयरमैन, रुड़की यूनिवर्सिटी सीनेट के सदस्य, यूपी 20 सूत्रीय कार्यक्रम के सदस्य, अतरौली मंडी समिति और कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे।
- 1985, 1989, 1991, 1993 व 1996 में कांग्रेस से चुनाव लड़े लेकिन हार मिली।
मुस्लिम आबादी कम फिर भी मिलते थे वोट ज्यादा
वह कहते थे कि क्षेत्र में मुस्लिम आबादी 4 फीसदी थी। 250 बूथों पर वह जीतते थे और 150 पर कल्याण सिंह। लोध बहुल बूथों पर 95% और उनके बूथों पर 30% पोलिंग होती थी। बूथ कैप्चरिंग भी बड़ी समस्या थी। 1990 के बाद राजनीति में सांप्रदायिक रंग आ गया, फिर भी 1993 की राम लहर में भी उन्हें 31 हजार वोट मिले थे। पहला चुनाव वह सिर्फ 204 वोटों से हारे थे।
प्रेमलता को माना पुत्रवधू, चुनाव लड़ने से किया इन्कार
अतरौली। डॉ. अनवार खां बताते थे कि कल्याण सिंह के साथ उनकी कभी सीधी बात नहीं हुई। न उन्होंने कभी कल्याण सिंह से कोई काम के लिए कहा और न कल्याण सिंह ने उनसे। 2007 में जब कल्याण सिंह की पुत्रवधू प्रेमलता चुनाव लड़ रही थीं, तो कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें चुनाव लड़ने को कहा था। उन्होंने मना करते हुए कहा था - प्रेमलता मेरी पुत्रवधू जैसी हैं, उनके सामने मैं नहीं लड़ सकता। हां, अगर कल्याण सिंह खुद लड़ें तो मैं जरूर लड़ूंगा।
किस्सों से भरी रही सियासी जिंदगी
वो किस्सा जब कल्याण सिंह बैठे अनशन पर एक बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव हो रहे थे। अतरौली ब्लॉक से कल्याण सिंह ने कृपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस के डॉ. अनवार खान विधायक और राज्यमंत्री थे। मुकाबला कांटे का था।
आरोप था कि डॉ. अनवार खान ने रात में कल्याण सिंह पक्ष के तीन बीडीसी सदस्यों को उठवा दिया। इससे कल्याण सिंह के प्रत्याशी की हार तय मानी जा रही थी। तब कल्याण सिंह अपने समर्थकों के साथ ब्लॉक पर अनशन पर बैठ गए। इस संकट में राजेंद्र सिंह उनके काम आए। वे विधानसभा सत्र छोड़कर अलीगढ़ आए और डीएम से बात कर कल्याण सिंह पक्ष के सदस्यों को बरामद कराया। ऐसे किस्सों से भरी रही डॉ. अनवार खान की सियासी जिंदगी। उनके जाने से अतरौली ने अपना सबसे बुजुर्ग और सादगी पसंद नेता खो दिया।
जब 50 हजार में जीत गए थे चुनाव, प्रचार को आईं थीं इंदिरा गांधी
अतरौली। आज जहां चुनाव में करोड़ों खर्च होते हैं, वहीं डॉ. अनवार खान 1980 में प्रचार में मात्र 50 हजार रुपये खर्च कर चुनाव जीत गए थे। आज इतने में तो सभासद का चुनाव भी नहीं लड़ा जाता। तब प्रचार सिर्फ एक जीप से होता था और जनता से सीधा संवाद उसके द्वार पर जाकर किया जाता था। 1980 के चुनाव में उनके समर्थन में खुद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अतरौली आईं थीं। उन्होंने जनसभा में जनता से अपील की थी, अनवार को जिता दो, यहां का विकास मेरी जिम्मेदारी है। उस दौरान इंदिरा गांधी ने पगडंडियों पर चलकर जनसंपर्क किया।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रशेखर राजपूत, बच्चू सिंह एडवोकेट कहते हैं कि विधायक बनने के बाद डॉ. अनवाार खान ने दर्जनों गांवों में सड़कों का जाल बिछाकर उन्हें शहर से जोड़ा। अतरौली से गोधा मार्ग का निर्माण, गन्ना मिल आदि उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि हैं।
जनाजे में इन्होंने जताया शोक
पूर्व मंत्री के जनाजे में रामपुर के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी, एमएलसी ऋषिपाल सिंह, पूर्व सांसद बिजेंद्र सिंह, चेयरमैन वीरेंद्र लोधी, सपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर, पूर्व विधायक वीरेश यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर चौधरी, सभासद सोहिल राईन, डॉ. कबीर खान, अब्दुल हमीद घोसी, डॉ.पुष्पेंद्र लोधी, केपी मिस्त्री, नीरज यादव, सलमान शाहिद, मनोज यादव, फरमान उल्लाह, शरीफ कुरैशी, शान मियां, प्रताप सिंह कुंतल, बच्चू सिंह, वीरपाल यादव, बादशाह खां, मुंसिफ अली, देवकी नंदन गुप्ता, विजयपाल गुप्ता, कंछीलाल वार्ष्णेय, जस्सू शेरवानी, यामीन अब्बासी, इलियास चौधरी, शैलेंद्र भान पचौरी, बोधपाल सिंह, प्रेम सिंह यादव आदि राजनीतिक लोग शामिल रहे।