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प्रतियोगिता में जज बनकर एएमयू में आए थे डॉ. आंबेडकर

Sat, 14 Apr 2018 02:18 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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लंदन के गोलमेज कांफ्रेंस में डॉ. आंबेडकर के पीछे की पंक्ति में बैठे अल्लामा इकबाल व नवाब छतारी। - फोटो : अमर उजाला
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डॉ. भीमराव आंबेडकर का अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एवं इसके छात्रों से गहरा संबंध रहा है। वह अपने जीवन काल में कई बार एएमयू में आए थे। 
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वर्ष 1934 में एएमयू छात्र संघ की ओर से एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें डॉ. आंबेडकर को जज के रूप में आमंत्रित किया गया था। उस समय सर सैयद के पौत्र सर रास मसूद कुलपति थे। छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में आले अहमद सरूर ने उनका स्वागत किया था। एएमयू उर्दू अकादमी के डायरेक्टर एवं पूर्व एएमयू पीआरओ डॉ. राहत अबरार ने बताया कि 24 अगस्त 1942 में वह डॉ. सर जियाउद्दीन के कुलपति काल में पुन: एएमयू में केंद्रीय श्रम मंत्री के रूप में यूनिवर्सिटी पालीटेक्निक की इमारत की आधारशिला रखने के लिए आए थे।

इस इमारत के लिए केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी। हालांकि यूनिवर्सिटी पालीटेक्निक की स्थापना 1936 में ही हो गई थी। आधारशिला समारोह के बाद स्ट्रेची हॉल में उनके सम्मान में एक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था।
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मुख्तार मसूद ने अपनी आत्मकथा में इसका विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने जिंदगी में सफलता के लिए अंग्रेजी में दक्षता हासिल करने का सुझाव छात्रों को दिया था। उन्होंने अंग्रेजी भाषा बोलने एवं समझने के लिए अंग्रेजी फिल्में देखन का भी परामर्श दिया था। उन्होंने छात्रों से छूआछूत को मिटाने, शोषित वर्ग के लिए समर्पित भाव से काम करने, जाति-पाति के भेद से ऊपर उठकर समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया था।
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भारत का भविष्य तय करने के लिए लंदन में आयोजित गोलमेल कांफ्रेंस (1932-34) के बीच डॉ. आंबेडकर की अलीगढ़ के कई पूर्व छात्रों से भेंट हुई। इसमें मौलाना मुहम्मद अली, शौकत अली और नवाब अहमद सईद खां ऑफ छतारी प्रमुख थे। लंदन की इस गोलमेल कांफ्रेंस में महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय, सर आगा खां भी शामिल थे। नवाब छतारी ने इन सबके सम्मान में एक भोज भी दिया था। उसमें बाबा साहब शामिल हुए थे। - डॉ. राहत अबरार, निदेशक एएमयू उर्दू अकादमी एवं पूर्व पीआरओ 
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