मडराक के दोहरे हत्याकांड में 24 घंटे में ही मौत के पीछे की वजह की परतें साफ हो गईं। इस बेरहम हत्याकांड के मूल में सामाजिक बदनामी और रिश्तेदारों के ताने निकलकर सामने आए हैं। हत्या के आरोपी शकील को बहन का अपने पति को छोड़ना और रिश्ते के मामा के बेटे संग यू शादीशुदा की तरह रहना नागवार तो पहले से ही था। मगर, रिश्तेदारों के तानों ने उसके सिर पर और खून सवार कर दिया। इसके बाद उसने इस हत्याकांड को अंजाम देने की ठानी और अपने दोस्त मनोज पुत्र भगवान सिंह निवासी सासनी, हाथरस को दस हजार रुपये का लालच देकर अपने साथ ले लिया। इन दोनों ने सोमवार रात को वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने बुधवार को शकील को जेल भेज दिया। जबकि मनोज अभी फरार है। इधर, बुधवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम हुआ और परिवार अपने-अपने बेटे-बेटी के शव ले गए।
मृतका शहनाज के भाई शकील की पत्नी सन्नो ने बताया कि शहनाज अपने पति शब्बन उर्फ शब्बे से आए दिन झगड़ा करती थी। जाने आलम उसे उकसाता था। दो साल पहले शहनाज ने अपने पति को छोड़ दिया और ससुराल आकर रहने लगी। इसके बाद जाने आलम का घर आना जाना बढ़ गया। रिश्तेदार होने के नाते उस पर शक नहीं हुआ। एक साल पहले दोनों के अवैध संबंधों की बात खुल गई। इसके बाद शहनाज और जाने आलम वहां से भागकर मडराक आ गए। यहां पहले शकील रहता है।
दोनों शकील के पास ही एक मकान में किराए पर रहने लगे। पति शकील ने विरोध किया तो उन्हें मारने की धमकी दे दी। इधर, रिश्तेदार इस घटना के बाद परिवार से कटने लगे। सामाजिक बदनामी होने लगी। ताने मिलने लगे। सन्नो का आरोप है कि कई बार मृतक जाने आलम का एक भाई भी घर आया और शहनाज और जाने आलम को मिलकर जान से मारने की बात कहता था। इधर, मृतक जाने आलम के परिवार ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने बेटे से रिश्ता तोड़ लिया था। उसके बारे में किसी भी प्रकार की कोई दखलंदाजी नहीं करते थे।
शहनाज के परिवार ने कहा, दो नहीं तीन लोगों ने की थी हत्या
शहनाज के परिवार के अनुसार जाने आलम और शहनाज की हत्या को दो नहीं बल्कि तीन लोगों ने की थी। तीसरा आरोपी खुद जाने आलम का भाई था। मगर, पुलिस उसे बचा रही है। जरूरत पड़ी तो उसके खिलाफ बहन और उसके प्रेमी की हत्या में शामिल होने की तहरीर दी जाएगी। हालांकि पुलिस इस बात से इंकार कर रही है। पुलिस के अनुसार शहनाज का परिवार जाने आलम के जिस भाई पर आरोप लगा रहा है, उसकी लोकेशन घटनास्थल के पास नहीं मिली है।
छह माह से हत्या की फिराक में था शकील
पुलिस की माने तो शकील इस रिश्ते से खुश नहीं था। वह छह माह से दोनों की हत्या को लेकर प्लान बना रहा था। कई बार उसका प्लान भी फेल हुआ। बहन को मारने को उसके हाथ न उठे। इसके लिए उसने दोस्त की मदद की। इसके बाद जाने आलम और शहनाज को बेरहमी से कत्ल कर मनोज ने मौत के घाट उतारा।
मौत के बाद भी शहनाज को न माना बहू
जाने आलम के परिवार ने पोस्टमार्टम के बाद जाने आलम के शव को तो गाड़ी में रखवा लिया। जबकि शहनाज के शव को पोस्टमार्टम पर ही छोड़ दिया। इस बात का शहनाज के परिवार ने विरोध किया और शहनाज के शव को भी साथ ले जाने को कहा को जाने आलम के पिता ने शहनाज को बहू मानने से इंकार कर दिया। वह उसके बच्चों को भी साथ रखने को तैयार न हुए।
मां के प्यार और मामा के हथियार ने बच्चों के भविष्य पर संकट डाला
इस दोहरे हत्याकांड ने एक प्रेम कहानी का खूनी अंत तो किया ही मगर दो मासूम बच्चों को भी जिंदगी भर दर-दर की ठोकरें खाने मजबूर कर दिया। शहनाज की छह साल की बेटी और चार साल के बेटे का अब कोई सहारा नहीं बचा। हालांकि अभी बच्चे हाजीपुर निवासी अपनी मौसी नफीसा के घर पर हैं। नफीसा ने कहा कि बच्चों के पिता शब्बन उर्फ शब्बे से बात की जाएगी। अगर, वह रखने को तैयार हुए तो ठीक नहीं तो इन बच्चों को हम या फिर इनकी नाना-नानी ही पालेंगे।