कुत्तों के हमलों को लेकर लोगों में जागरूकता का अभाव भी है। उन्हें यह नहीं पता होता कि कुत्ते यदि हमलावर हों तो उनसे कैसे बचाव करें ? नगर निगम के स्तर से कुत्तों की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए उनकी नसबंदी कराने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इस बारे में उनकी संस्था कई बार नगर निगम के अफसरों से मिल चुकी है लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।- आशा सिसौदिया, जीव दया फाउंडेशन
कुत्ते के काटने पर लोगों को हल्दी, चूना और नमक के भरोसे नहीं रहना चाहिए। तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। माता-पिता बच्चों को कुत्ते को रोटी खिलाने नहीं भेजें, क्योंकि कुत्तों का व्यवहार कभी भी बदल सकता है और वह हमलावर हो सकता है।- डॉक्टर जितेंद्रवीर सिंह, फिजीशियन
शहर में आबादी के हिसाब से कुत्तों की संख्या 55- 60 हजार है। नगर निगम के स्तर से पिछले तीन साल में करीब 18 हजार से अधिक आवारा कुत्तों को वैक्सीन लगाने के साथ ही उनकी नसबंदी की जा चुकी है। निरंतर यह प्रक्रिया जारी है।- डाॅक्टर राजेश वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
कुत्ते के काट लेने पर पीड़ित को तुरंत साफ पानी और साबुन से उस जगह को अच्छे से धो लेना चाहिए। क्योंकि कुत्तों के लार में रैबीज नामक कीटाणु होते हैं, जो जानलेवा होते हैं। इसलिए कुत्ते के काटने पर इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। वैक्सीन की पूरी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। कुत्ते के काटने के बाद इंजेक्शन नहीं लगवाने से मौत तक हो सकती है। पालतू कुत्तों की अपेक्षा स्ट्रीट डॉग को रैबीज होने का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि इनका नियमित टीकाकरण नहीं हो पाता है।- डॉक्टर दिवाकर वशिष्ठ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
आवारा कुत्तों को पकड़ने के अभियान में नगर निगम कर्मचारी खानापूर्ति करते हैं। एक या दो जगहों पर कुत्ते को पकड़ने का फोटो खींचकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। जो जनहित मे सही नही है। सरकार को इन कर्मचारियों के लिए भी एक गाइड लाइन बनानी चाहिए, जिससे नगर निगम कर्मचारियों के कार्यों की पारदर्शिता बनी रहे ।- आशीष माहेश्वरी, मामू भांजा
पालतू व आवारा कुत्तों की नसबंदी जरूरी
आवारा कुत्तों की नसबंदी आवश्यक रूप से होनी चाहिए, जिससे भविष्य में इनकी जनसंख्या वृद्धि पर थोड़ा अंकुश लग सके। यदि ऐसा नही होता तो फिर सड़को और गलियों में आवारा कुत्ते बच्चों के साथ- साथ बड़ो को भी अपना शिकार बनाएंगे।- तारकेश वार्ष्णेय, किशनपुर, रामघाट रोड
बढ़ती जनसंख्या नियंत्रण के लिए बने कानून
आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या के लिए सरकार को कानून बनाकर नसबंदी आदि योजना चलकर जनसंख्या नियंत्रण करना चाहिए। आवारा कुत्तों को रखने के लिए शहर में पर्याप्त जगह की व्यवथा की जाए। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा इन आवारा कुत्तों के लिए जगह की व्यवस्था के बाद इनके खाने का भी इंतजाम करना चाहिए।- मनीष ठाकुर, लाल मंदिर, रामघाट रोड
शहर में कुत्तों एवं बदरों के हमलों की शिकायतें लगातार की जाती रही हैं, लेकिन इन शिकायतों पर न नगर निगम अफसर ध्यान दे रहे हैं और न ही प्रशासनिक अफसर ही इस ओर ध्यान दे रहे हैं। इससे इनके हमले बढ़ रहे हैं।- अखिलेश शर्मा, नाैरंगाबाद छावनी
बच्चों को अकेले भेजने में लगता है डर
शहर से लेकर देहात तक कुत्तों का अच्छा खासा आतंक देखने को मिल रहा है। राह चलना तक मुश्किल हो रहा है पता नहीं किसी गली, मुहल्ले से अचानक कुत्ता आ जाए और हमलावर हो जाए । बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने में दिक्कतें होती है।- सरिता वार्ष्णेय , एडीए काॅलोनी, सासनीगेट
रात के साथ दिन में भी बना रहता है खतरा
कुत्तों का आतंक रात में ही नहीं दिन में भी देखने को मिल रहा है। शहर की हर गली, मोहल्ले,चौराहों पर आवारा कुत्तों का झुंड बना रहता है। इस ओर शिकायतों के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।- रिचा दीक्षित, बैंक काॅलोनी, प्रीमियर नगर