जेएन मेडिकल में हड़ताल होने पर वापस लौटते मरीज
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हादसे के घायल को भी नहीं मिला इलाज
सहजपुर पिसावा निवासी चंद्रप्रकाश सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उनके सिर और पैर में गंभीर चोटें थीं। परिवार के लोग उन्हें उम्मीद के साथ मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें भी भर्ती नहीं किया गया। हालत बिगड़ती देख परिजन मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल ले गए।
मेडिकल कॉलेज परिसर में बढ़ी बेचैनी
इमरजेंसी सेवाएं बंद होने से मेडिकल कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। दूर-दराज़ से आने वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च गरीब परिवारों पर भारी पड़ रहा है।
डॉक्टरों को मनाने में जुटा यूनिवर्सिटी प्रशासन
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म कराने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन जुट गया है। डॉक्टरों को मनाने में लगे हैं कि वह इमरजेंसी की ड्यूटी पर लौटें, क्योंकि गरीब मरीजों को परेशानी हो रही है। रही बात उनकी मांगों की, तो उन पर गौर करने का वादा भी किया जा रहा है।
जूनियर डॉक्टरों के दर्द काे समझना होगा : अमुटा
अमुटा के अध्यक्ष प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों के दर्द को भी समझना होगा। आखिर उन्हें बार-बार हड़ताल पर जाने की जरूरत क्यों पड़ती है। मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। यह भी जानना अहम है कि क्या डॉक्टरों पर कार्य का दबाव तो नहीं है। कार्य दबाव के चलते उनका व्यवहार तो नहीं बदल रहा है, सभी बिंदुओं पर गहन मंथन करना होगा।