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बेटी के बिना घर नहीं चलते

Wed, 03 Feb 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
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बेटियों के बिना घर चलते नहीं, बेटियों के बिना घर सजते नहीं, बेटियों के बिना दीप जलते नहीं, बेटियों के बिना वंश चलते नहीं। यह पंक्तियां कन्या गुरुकुल सासनी की प्राचार्य डॉ. पवित्र विद्यालंकार ने नुमाइश के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य एवं राष्ट्र रक्षा सम्मेलन में प्रस्तुत की।
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माता निर्माता भवति के नारे के साथ शुरू किये उद्बोधन में उन्होंने कहा कि नारी जाति का संस्कारवान होना जरूरी है। मानव मात्र का धर्मग्रंथ वेद विषय पर पं.देवनारायण भारद्वाज ने कहा कि मानव मान्यताएं संप्रदाय पर आधारित हो सकती हैं। लेकिन वेद सर्वमान्य और सार्वभौमिक है। गऊ रक्षा से राष्ट्र रक्षा विषय पर गुरुकुल साधु आश्रम के प्राचार्य आचार्य जीवन सिंह आर्य ने कहा कि वेदों में गाय को विश्व की माता करार दिया गया है।

मुख्य अतिथि डॉ. राजदेव आचार्य ने कहा कि व्यक्ति संस्कारों से दूर होता जा रहा है। उसे दो ही संस्कार जीवन में महत्वपूर्ण दिखते हैं जिनमें विवाह संस्कार एवं एक अंतिम संस्कार हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति में संस्कारों की महत्ता बताते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी का उदाहरण दिया। माता जीजाबाई ने उन्हें एक राष्ट्र निर्माण के लिए संस्कारों द्वारा ही तैयार किया था। 
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इस मौके पर कन्या गुरुकुल सासनी की कन्याओं ने सामूहिक रूप से एक भजन प्रस्तुत किया। गुरुकुल साधु आश्रम के ब्रहमचारियों ने संस्कृत में गीत प्रस्तुत किया। शुभारंभ वैदिक यज्ञ से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य इंद्रपाल सिंह ने तथा संचालन वेद मुनीष न्याय के अध्यक्ष डॉ.पपेंद्र आर्य ने किया। इस मौके पर कार्यक्रम प्रभारी गयाप्रसाद गिर्राज, रामदीन आर्य, योगेश शर्मा, राजेंद्र शर्मा, पंकज आर्य, खुशपाल आर्य, विनीता आर्य आदि थीं।
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