जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में बिना अनमुति घुस कर अफरातफरी फैलाने के आरोप में अकराबाद ब्लाक के गांव नानऊ के 23 ग्रामीणों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में शांति भंग की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिसमें अशोक पुत्र महावीर, अशोक पुत्र महीपाल सहित 15 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल हैं।
उन्हें अदालत की अवमानना का नोटिस देने की तैयारी चल रही थी, लेकिन रात में डीएम ने इस फैसले को वापस ले लिया। इस मामले में जिला मजिस्ट्रेट डा. बलकार सिंह ने कलक्ट्रेट की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी आड़े हाथ लिया है।
अपनी तरह का यह पहला वाकया है, जब कलक्ट्रेट परिसर और वहां की अदालतों में अनुशासन और शांति बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों पर जिला प्रशासन इतना सख्त हुआ है। मंगलवार से मुख्यद्वार पर सुरक्षा व्यवस्था को और दुरुस्त किया जाएगा। सोमवार दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे जिला मजिस्ट्रेट डा.बलकार सिंह अपनी अदालत में एक मुकदमे की सुनवाई कर रहे थे।
वादी और प्रतिवादी पक्ष अपने-अपने वकीलों के साथ मौजूद थे। तभी अकराबाद ब्लाक के गांव नानऊ के दर्जनों ग्रामीण एक साथ बिना अनमुति अदालत में घुस आए और गांव के राशन कोटेदार की शिकायत करने लगे। मुकदमे की सुनवाई कर रहे जिला मजिस्ट्रेट डाॅ. बलकार सिंह इससे खासे नाराज हुए।
एलआईयू और पुलिस कर्मियों के मना करने के बाद भी ग्रामीण अदालत के अंदर चले जाते हैं। इसपर जिला मजिस्ट्रेट ने ग्रामीणों को बाहर जाने का निर्देश दिया। इसके बाद एडीएम प्रशासन संजय चौहान के माध्यम से सिविल लाइंस इंस्पेक्टर सूर्यकांत द्विवेदी को बुलाकर शांतिभंग में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। महिला पुलिस कर्मी भी बुलाई गईं। पुलिस की सक्रियता देख ग्रामीणों के होश उड़ गए।
गलती का अहसास होने पर वे माफी की मुद्रा में आ गए, पर कोई राहत नहीं मिली। इंस्पेक्टर सूर्यकांत द्विवेदी ने बताया कि सभी को अदालत की अवमानना का नोटिस देने की तैयारी हो रही है।