जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती मरीज।
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जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं इन दिनों वेंटिलेटर पर नजर आ रही हैं। पिछले एक साल से डीजल के बिलों का भुगतान न होने के कारण अस्पताल की वैकल्पिक बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बकाया राशि 12 लाख रुपये तक पहुंचने के चलते संबंधित फिलिंग स्टेशन ने अस्पताल को डीजल की आपूर्ति बंद कर दी है।
डीजल न होने का खामियाजा अस्पताल में भर्ती तीमारदारों और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। बीती रात 1 बजे से सुबह 4 बजे तक बिजली गुल रहने के दौरान अस्पताल का जनरेटर नहीं चल सका। कुछ वार्डों में पंखे बंद होने के कारण मरीज रातभर मच्छरों से परेशान रहे। मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया कि मरीजों का बिस्तर पर लेटना दूभर हो गया। गंभीर हालत में भर्ती मरीजों के लिए यह स्थिति और भी असहज करने वाली रही।
सोलर पैनल भी साबित हुए बेकार
अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि बिजली संकट से निपटने के लिए कुछ महीने पहले 10 लाख रुपये की लागत से लगाए गए सोलर पैनल भी शोपीस बने हुए हैं। तकनीकी खराबी या रखरखाव के अभाव में ये सोलर पैनल काम नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में भी वार्डों को रोशनी और हवा नहीं मिल पा रही है।
शासन से पैसा नहीं आने के चलते डीजल का भुगतान नहीं हो पा रहा है। भुगतान के लिए पत्र लिखा गया है। कुछ घंटे के बिजली कटौती हुई थी, जिसके चलते मरीजों को असुविधा हुई।
- डॉ. जगबीर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल