उच्च न्यायालय द्वारा लॉकडाउन अवधि के दौरान जिला न्यायालय के संचालन हेतु दिए गए निर्देशों के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश राममनोहर नारायण मिश्रा ने निम्न न्यायालयों को प्रतिबंधों के साथ संचालन के निर्देश दिए हैं। जनपद न्यायालय का कामकाज आगामी 26 मई से चालू होगा, लेकिन कई शर्तों के साथ। जिसके अनुसार जिला एवं सत्र न्यायालय अलीगढ, पारिवारिक न्यायालय, विशेष न्यायालय- एससी/एसटी, ईसी एक्ट, गैंगस्टर, एनडीपीएस, पोक्सो, न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज (वरि.प्र.), अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) / प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड, सिविल जज (कनि.प्र.) कोल, अतरौली, इगलास व खैर के न्यायालय काम करेंगे।
उपरोक्त न्यायालयों द्वारा संपादित किये जाने वाले कार्य जैसे नये/पुराने वाद का अंगीकरण, लंबित/नये जमानत प्रार्थना-पत्र, लंबित/नये अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र, वाहन अवमुक्ति व लघु प्रकृति के आपराधिक मामले, लंबित/नये आवश्यक निषेधाज्ञा मामलों की सुनवाई, पुलिस रिपोर्ट की प्राप्ति एवं निस्तारण (धारा 173 द.प्र.सं.), विवेचक द्वारा दाखिल प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण (जैसे- गैर जमानती वारंट/ धारा 82 व 83 द.प्र.सं की प्रक्रिया जारी करने के आवेदन व धारा 164 दं.प्र.सं के अंतर्गत बयान दर्ज करने के आवेदन इत्यादि), विचाराधीन बंदियों से संबंधित रिमांड व अन्य न्यायिक कार्य (वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से / तकनीकी व्यवधान पर अन्य माध्यम से) निपटाए जाएंगे। मुकदमों में बहस पूर्ण होने की स्थिति में आदेश / निर्णय पारित किये जाने का कार्य, अन्य प्रशासनिक व कार्यालय संबंधी लंबित कार्य भी होंगे।
जनपद न्यायाधीश के निर्देश
1- प्रार्थना-पत्रों/वादों के निस्तारण के समय सभी विधिक प्रावधानों का सख्ती से पालन हो।
2- कार्य पूर्ण होने पर न्यायिक अधिकारी व कर्मचारी न्यायालय परिसर छोड़कर जा सकते हैं।
3- न्यायिक अधिकारी/अधिवक्ता द्वारा मांग किये जाने पर वर्चुअल-कोर्ट की सुविधा दी जा सकती है।
4- नये वाद/प्रार्थना-पत्र की प्राप्ति हेतु केंद्रीयकृत कंप्यूटर प्रणाली का प्रयोग हो।
5-सभी वाद/प्रार्थना-पत्र सीआईएस में पंजीकृत हों।
6- सभी वाद/प्रार्थना-पत्रों को अधिवक्ता/वादकारी का विवरण व उनके मोबाइल नंबर सहित दिया जाये।
7-वाद व प्रार्थना-पत्र में त्रुटि होने पर संबंधित को उसी दिन सूचित किया जाये।
8-केंद्रीयकृत कंप्यूटर प्रणाली में आने वाले अधिवक्ता को ई-कोर्ट एप की जानकारी दी जाए।
9- पक्षकार लिखित बहस कंप्यूटर प्रणाली में दाखिल कर सकते हैं, जो न्यायालय को प्रेषित किया जाएगा।
10- जमानत/अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र व अन्य प्रार्थना पत्र ई- मेल पर भेजे जाएं।
11- सभी जमानत/अग्रिम जमानत प्रार्थना-पत्र लोक अभियोजन/डीजीसी क्रिमिनल को समय से दी जाए।
12- केवल वही न्यायालय कक्ष खोले जाएंगे, जहाँ अधिवक्ता द्वारा अपना पक्ष रखा जाएगा।
13-न्यायालय कक्ष में केवल चार कुर्सियां होगी, मास्क लगाना अनिवार्य है।
14-न्यायालय कक्षों में एक स्टूल व सेनेटाइजर रखा जायेगा,सभी इसका प्रयोग करेंगे।
15-सभी कर्मचारी सामाजिक दूरी संबंधी सरकार व उच्च न्यायालय के निर्देशों को पालन करेंगे।
16-न्यायालय कक्ष में अधिवक्ता व वादकारी के अस्वस्थ होने पर प्रवेश नहीं मिलेगा।
17-पीठासीन अधिकारी कक्ष में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की संख्या सीमित करने हेतु आदेश कर सकेंग
18-उपरोक्त वर्णित मामलों के अतिरिक्त अन्य सभी मामलों की सुनवाई अग्रिम आदेश तक स्थगित है।
19-परिसर में प्रवेश करने वाले सभी व्यक्तियों का थर्मल स्कैनिंग हेतु व्यवस्था जिला प्रशासन करेगा।
20-परिसर में स्टांप वैंडर/ ओथ कमिश्नर, अधिवक्तागण के टाइपिस्ट सीमित संख्या में आएंगे।
21-जनपद न्यायालय का हेल्पलाइन नम्बर 0571-2406798 और 2409889 घोषित किया जाता है।
22-प्रशासनिक कार्यालय, लेखा, केंद्रीय नजारत, अभिलेखागार, पुस्तकालय, प्रतिलिपि विभाग, कंप्यूटर अनुभाग के 33 प्रतिशत कर्मी उपस्थित रहेंगे।
23-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इलेक्ट्रॉनिक मोड से जागरूकता हेतु प्रचार-प्रसार करेगा।