फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

औषधियों के प्रतिरोधी प्रभाव वाले नए अणुओं की खोज

Tue, 01 Aug 2017 02:28 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
विज्ञापन
प्रो. असद यू खान। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज कैंपस के नाले में सुपरबग की खोज का दावा कर सुर्खियों में आने वाले एएमयू के इंटरडिसीप्लीनरी बायोटेक्नॉलोजी यूनिट के प्रो. असद यू खान एक बार फिर नई खोज का एलान कर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने विभिन्न औषधियों के प्रतिरोधी प्रभाव वाले नए अणुओं की खोज का दावा किया है, जिसका प्रयोग एंटीबायोटिक जीवाणुओं वाली औषधियों में किया जा सकता है।  
विज्ञापन


प्रो. असद उल्लाह ने बताया कि उनके द्वारा खोजे गए सुपरबग के समाचार ने वैज्ञानिकों तथा शोध कर्ताओं के समक्ष जीवाणुओं पर काबू पाने की चुनौती उत्पन्न कर दी थी। परंतु उनकी इस आधुनिक खोज से सारे वैज्ञानिक अब शांति का अनुभव करेंगे। उन्होंने कहा कि इन नये अणुओं की खोज से विभिन्न प्रकार के जैविक संक्रमणों की प्रतिरोधी औषधियों के निर्माण में आसानी होगी तथा उन बीमारियों का भी निवारण हो सकेगा जिन पर वर्तमान में उपलब्ध एंटीबायोटिक औषधियां प्रभावहीन हो चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि इस नई खोज पर आधारित उनका शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘साइंटीफिक रिपोर्ट ऑफ  नेचर’ में प्रकाशित हो चुका है। इसके अतिरिक्त प्रो. खान ने एक जीन सुधार टेक्नोलॉजी भी विकसित की है, जिसकी सहायता से बायोफिल्म द्वारा उत्पन्न संक्रमण पर काबू पाया जा सकेगा। इससे संबंधित उनका शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘फ्रंटीयर्स इन सेलूलर एंड इंफेक्शन माइक्रोबायोलोजी’ में प्रकाशित हो चुका है। 
विज्ञापन


प्रो. खान को जीवाणु विरोधी औषधियों के विकास के लिए जाना जाता है तथा उन्हें 2012 के नेशनल बायो साइंस के अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2014 में प्रो. असद यू खान ने मेडिकल कॉलेज कैंपस के सीवरेज में नई दिल्ली मेटालो बीटा लेक्टमास-4 (एनडीएम-4) नामक सुपरबग बैक्टीरिया की खोज का दावा कर तहलका मचा दिया था। हालांकि प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने इस खोज पर उस समय सवाल उठाया था। 

अत्यधिक एंटीबायोटिक के सेवन से फैलता है बैक्टीरिया 
 सितंबर 2014 में एएमयू के प्रो. असद उल्लाह खान ने जेएन मेडिकल कॉलेज कैंपस के सीवरेज में सुपरबग बैक्टीरिया की खोज का दावा किया था। उस समय यह भी कहा गया था कि भारत में सुपरबग एनडीएम 4 की मौजूदगी पहली बार दर्ज की गई है, जो चिकित्सा जगत के लिए गंभीर चुनौती है। उस समय यह भी कहा गया था कि इससे पूर्व कैमरून, डेनमार्क, फ्रांस एवं चेक गणराज्य में एनडीएम 4 पाया गया है। यह एनडीएम 1 से ज्यादा खतरनाक है। डॉ. असद का कहना था कि सुपरबग एंटीबायोटिक के अत्यधिक इस्तेमाल का नतीजा है। इसके नियंत्रण को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है।  
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें