औद्योगिक क्षेत्रों के पास बढ़ रहा दबाव
सीएसआईआर-नीरी के मूल्यांकन में मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, आगरा और मथुरा के औद्योगिक क्षेत्रों के पास भूजल के नमूनों की जांच की गई। यमुना और हिंडन नदी के किनारे लिए गए बोरवेल नमूनों में भारी धातुओं की मौजूदगी दर्ज की गई, हालांकि ये बीआईएस मानकों के भीतर पाई गई। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि औद्योगिक अपशिष्ट और शहरी विस्तार का दबाव लगातार भूजल की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।
भूजल बढ़ा, लेकिन सुरक्षित नहीं
केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 के 69.92 अरब घन मीटर से बढ़कर 2025 में 73.39 अरब घन मीटर हो गया है। इसके बावजूद भूजल दोहन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2017 में 70.18% के मुकाबले 2025 में भूजल उपयोग 70% पर है। यानी पानी बढ़ा जरूर है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित उपलब्धता पर सवाल खड़े हैं।
अलीगढ़ में स्थिति ज्यादा संवेदनशील
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक अपशिष्ट और भारी धातुएं भूजल को तेजी से दूषित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के पानी में कई तत्वों के साथ जिंक की मात्रा भी बढ़ी है। अगर अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
यह उठाए कदम
- गंगा क्षेत्र में सीमेंट-सीलिंग तकनीक का उपयोग कर 294 भूजल निगरानी कुएं बनाए गए।
- फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में मिश्रित जल आपूर्ति और ट्रीटमेंट प्लांट।
- नाइट्रेट नियंत्रण के लिए उर्वरक प्रबंधन और मृदा परीक्षण।
- यूरेनियम के लिए आरओ, सोखना और निष्कर्षण तकनीक।
- सीसा और भारी धातुओं के लिए फिल्ट्रेशन सिस्टम की स्थापना।