आगरा रोड स्थित कान्हा गौशाला व बरौला में नंदी गोशाला का हाल
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अब जारी हुए नए निर्देश
पहला तो ये कि सभी जगह सीसीटीवी लगवाए जाएंगे अनिवार्य रूप से। दूसरा दस क्विंटल भूसा हर गोशाला पर रखना अनिवार्य होगा। तीसरा मंडल स्तर पर प्रदेश से टीम जांच व निगरानी के लिए आएगी। वह सच जानकर रिपोर्ट शासन को देगी। जिले का भूसा उस जिले से बाहर बेचने नहीं जाने दिया जाएगा।
ये है नगर निगम के गोआश्रय स्थलों का हाल
नगरीय क्षेत्र में नगर निगम अलीगढ़ द्वारा संचालित दो गोआश्रय स्थलों में 602 गोवंश पल रहे हैं। जिनकी तस्वीर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे उन्हें नांद में काई युक्त पानी पिलाया जाता है। सूखा भूसा खिलाया जाता है, जो अगले दो तीन दिन में खत्म होने के कगार पर है। दावे के अनुसार हर दिन हरा चारा लाया जाता है। मगर रविवार को क्यों नहीं आया। इसका किसी के पास जवाब नहीं था। हां, सीसीटीवी से निगरानी व सुरक्षा इंतजाम तो हैं। मगर बीमारी से तड़प रहे गोवंश को देखकर उनकी नियमित जांच व उपचार का अभाव यहां स्पष्ट दिखाई दिया।
चारे का हॉल पड़ा खाली, गोवंश को खिला रहे पुआल
गभाना के वीरपुरा में गोवंश धान का पुआल खाने को मजबूर हैं। 175 गोवंश में कई बीमार हैं। परिसर में गंदगी फैली हुई थी। कर्मचारी ने बताया कि गोवंश की देखभाल के लिए चिकित्सक बुलाने पर आते हैं। इसी तरह जवां के गांव दवथला की गोशाला का भी हाल बेहाल है। इसमें 40 गोवंश हैं। मौके पर हालत इतनी खराब है कि गोवंश के लिए न भूसे की व्यवस्था है और न ही हरे चारे की व्यवस्था है। चारे की जगह पुआल खिलाया जा रहा है। चारे के लिए बना हॉल खाली पड़ा है। ग्राम प्रधान शमशेर खां ने बताया कि जब चारा खत्म हो जाता है, तभी चारा मंगाया जाता है, सुबह चारा खत्म हो गया था।
अकराबाद के नगला सरताज की सरकारी गोशाला में गोवंश को चारे की जगह कुटी हुई पराली खिलाई जा रही है। गोशाला की क्षमता 175 की है, लेकिन 75 गोवंश ही मौके पर मौजूद हैं। देखभाल के लिए करीब तीन कर्मचारी हैं, इसके बाद भी परिसर में गंदगी बनी रहती है। इसी तरह टप्पल क्षेत्र की हजियापुर के पास की गोशाला में तो सुरक्षा का आलम ये है कि यहां कुत्ते गोवंश को नोचते रहते हैं। कोई देखने वाला नहीं होता। कमोबेश यही हालात चंडौस, दादों, जलाली, छर्रा, इगलास, अतरौली आदि क्षेत्र के गो आश्रय स्थलों की है। सबसे खास बात ये है कि देहात में पंचायत के अधिकांश गाे आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी तक नहीं हैं। ऐसे में वहां की सही स्थिति की निगरानी नहीं हो सकती।
बरौला में नंदी गौशाला का हाल
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