छर्रा मंडी परिसर के बाहर बारिश में कतार में खड़े वाहन। संवाद
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जिले में शुक्रवार की देर रात से शुरू हुई बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में पककर तैयार खड़ी धान व बाजरा की फसल को नुकसान पहुंचाया है। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से जमीन पर कटी पड़ी फसल भीग गई, जबकि हवा के कारण खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई। इससे किसानों को दाना काला पड़ने, सड़ने और कटाई में अतिरिक्त खर्च की चिंता सताने लगी है। इससे धान के रेट भी कम मिलने की संभावना बन गई है।
अतरौली के कुंवरपुर के किसान प्रताप सिंह कुंतल ने बताया कि खेत में कटी पड़ी धान की फसल लगातार भीगने से खराब हो सकती है। गांव पैंडरा के चौधरी राय सिंह का कहना है कि खेतों में पानी भरने के बाद अगर तेज हवा चली तो तैयार बाजरा की फसल गिर जाएगी। इससे फसल की कटाई में मजदूरी बढ़ जाएगी। गांव रजातऊ के बंटी चौधरी ने बताया कि मंडी में जमीन पर पड़े धान भीग गए हैं। इससे रेट कम मिलेंगे और धान को बचाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। मंडी सचिव प्यारेलाल मथुरिया ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम देखकर ही कृषि उपज मंडी में लाएं।
फसल के नुकसान का सर्वे कराने की मांग
अकराबाद, गंगीरी समेत अन्य क्षेत्रों में देर रात से शुरू हुई बारिश से धान और बाजरा की फसल प्रभावित हुई है। कटी फसल पानी में डूब गई, जबकि तेज हवा से खेतों में खड़ी फसल भी गिर गई। भाकियू टिकैत के युवा जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव ने नुकसान का आकलन कराकर किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
- अधिक बारिश होने से धान व बाजरा का दाना प्रभावित हो सकता है। सोमवार से गांवों में टीमें भेजकर फसल के नुकसान का आकलन कराया जाएगा। उर्द और सरसों की फसल की बुवाई के लिए किसानों को अभी इंतजार करना चाहिए।- धीरेंद्र कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी ।