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चार साल में डीजल 22 फीसदी महंगा हुआ, गन्ना एक रुपये भी नहीं

Tue, 16 Feb 2021 01:32 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
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अजीत पंडित गन्ना किसान। - फोटो : CITY OFFICE
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उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को गन्ने का सरकारी रेट घोषित किया। किसानों को सौ फीसदी उम्मीद थी कि इस बार गन्ने का रेट बढ़ेगा, क्योंकि नये तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन चल रहा है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। योगी सरकार के ताजा एलान के अनुसार वर्ष 2017 से चल रहे रेट पर ही गन्ना खरीदा जाएगा। चार साल से गन्ने का रेट 315 से 325 रुपये प्रति क्विंटल पर ही अटका है।
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ट्रैक्टर में डीजल डलवा कर गन्ना लाद कर साथा चीनी मिल पहुंचे किसानों ने कहा कि डीजल का रेट महज तीन साल में 22 फीसदी तक बढ़ गया, लेकिन उनका गन्ना उसी कीमत पर पड़ा है। डीजल, खाद, सिंचाई, बिजली, बीज, यूरिया सब कुछ 20-25 फीसदी तक महंगा हुआ, लेकिन गन्ना के सरकारी रेट नही बढ़ें। किसानों ने कहा कि यही सरकार की आय दोगुनी करने की योजना है..? जिसका बखान करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार थकती नहीं है।

इधर, जिले में गन्ना किसानों में सरकारी सिस्टम के प्रति असंतुष्टि लगातार बढ़ रही है। इस अवधि में गन्ने का रकबा भी लगभग दो हजार हेक्टेयर कम हो गया है। गन्ने की खेती का ये हाल तब है जब जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश राणा गन्ना एवं चीनी मिल विभाग के प्रदेश के कबीना मंत्री हैं। यहीं नहीं भाजपा के बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह भी पूर्व गन्ना मंत्री है और जिले की एक मात्र सहकारी चीनी मिल उनकी विधानसभा में आती है।
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बिना रेट की पर्ची मिल रही
गन्ने का सीजन शुरू होने के बाद से अभी तक किसानों को गन्ना तौल की जो रसीद दी जा रही थी, उस पर रेट नहीं अंकित हो रहा था। अब रेट अंकित करने की व्यवस्था की जा रही है। अभी तक दो हजार किसानों से ढाई लाख क्विंटल गन्ना खरीदा गया है। वर्तमान में साथा चीनी मिल में 600 क्विंटल चीनी का उत्पादन प्रति दिन हो रहा है। मिल में लगभग 58 हजार क् िवंटल चीनी का स्टाक है। पिछले साल 6 लाख 25 हजार क्विंटल गन्ना लिया गया था।

इसी सप्ताह से गन्ना भुगतान शुरू
साथा चीनी मिल के जनरल मैनेजर रामशंकर ने बताया कि सरकार ने रेट घोषित कर दिया है। इसी सप्ताह से बैंकों के माध्यम से किसानों का भुगतान शुरू करा दिया जाएगा। इसकी सूचना भी किसानों को दी जाएगी।

सरकारी आंकड़ों में फायदा
जिले में गन्ने की फसल वर्तमान में सात हजार हेक्टेयर में हैं। सरकारी आंकड़ों में यहां पर एक हेक्टेयर का औसत उत्पादन लगभग 850 क्विंटल तक आंका जाता है। जिला गन्ना अधिकारी बताते हैं कि एक हेक्टेयर में फसल का खर्च लगभग सवा लाख रुपये तक आता है। 315 रुपये प्रति क्विंटल के अनुसार किसान को 850 क्विंटल के 2.67 लाख मिलेंगे। ऐसे में उसको 1.42 लाख रुपये बचेंगे। इसलिए सरकारी रेट कम नहीं है।

एक बीघा गन्ना की फसल पर लगभग 15 हजार रुपये खर्च आता है। जिसमें 60 क्विंटल की पैदावार मिल रही है। 315 रुपये के हिसाब से ये साथा चीनी मिल से हमें 18900 रुपये मिलेंगे। इतनी मेहनत के बाद पांच हजार रुपये ही बच पाएंगे। ऐसी खेती से क्या पेट भरेगा। फसलों का रेट नहीं बढ़ रहा तो डीजल क्यों महंगा करती है सरकार। उनका रेट भी वैसा ही होना चाहिए। -संजय निवासी नगला झिड़ू सिंह

साथ चीनी मिल संचालन को सरकार चार साल में दुरुस्त नहीं करा पाई है। गन्ने का रेट भी नहीं बढ़ रहा है। ऐसे में हमें गन्ने की खेती को छोड़ना ही पड़ेगा। हम दूसरी फसलें करेंगे। गन्ने की खेती अब नुकसान का जरिया बन चुकी है। सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। - अजित पंडित, निवासी तेलपुर।

गन्ने की एक बीघा की लागत लगभग 12-14 हजार तक पहुंच गई है। सर्द रातों में जानवरों से फसलों को बचाना पड़ता है। इसके बाद अगर पांच हजार रुपये ही बचें तो इससे बेहतर कोई दूसरा काम कर लें हम। अब इसमें कुछ बच नहीं रहा है।
-बाबू, निवासी गांव पकरा।

जब तक खेती में इस्तेमाल होने वाली सभी चीजें महंगी हो रही हैं तो सरकार को उसी अनुपात में फसलों का समर्थन मूल्य देना होगा। अगर सरकार फसलाें की लागत नहीं देगी तो कौन देगा..? किसानों को भी खेती के नये तौर तरीके समझने होंगे।
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-राजेंद्र मेहरा, पूर्व डायरेक्टर आनंद एग्रोकेम, गोपी लधुआ।
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