वेटिंग लिस्ट में शामिल मरीजों की स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। यदि जल्द ही मशीनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई या नई शिफ्ट शुरू नहीं हुई, तो यह प्रतीक्षा सूची मौत की सूची में बदल सकती है। गरीब मरीजों के लिए निजी अस्पताल पहुंच से बाहर हैं और सरकारी अस्पताल में जगह नहीं है।
केस 1-निजी अस्पताल का खर्च वश से बाहर
बेगपुर निवासी 55 वर्षीय मरीज पिछले चार महीनों से डीडीयू अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। उनके परिजन आसिफ ने बताया कि उनकी दोनों किडनी खराब हैं। प्राइवेट अस्पताल में एक बार की डायलिसिस का खर्च तीन से चार हजार रुपये आता है, जो हमारे वश से बाहर है। डीडीयू में नाम लिखाया था, लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि अभी बेड खाली नहीं है। अब उनकी हालत और बिगड़ रही है।
केस 2-इंतजार में टूटी उम्मीद
क्वार्सी इलाके की रहने वाली 50 वर्षीय महिला अगस्त से वेटिंग लिस्ट में थी। उनके परिजनों का कहना है कि वे हर हफ्ते अस्पताल जाकर गुहार लगाते थे, लेकिन नंबर नहीं आया। अस्पताल की तारीखों और बीमारी के दर्द के बीच पिछले महीने विमला देवी की सांसें टूट गईं। उनके जैसे कई मरीज हैं, जो सिस्टम की सुस्ती और संसाधनों की कमी के कारण इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।