अगर, आपका बच्चा गुमसुम है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है या फिर किसी चीज को पाने के लिए हद से ज्यादा जिद करता है और न मिलने पर घर छोड़ने या मरने की धमकी देता है तो सावधान हो जाइए। दरअसल, बच्चा कंडक्ट डिसऑर्डर नाम की बीमारी का शिकार हो रहा है। यह बीमारी 14 साल से कम उम्र के बच्चों के दिमाग में घर बना रही है। आरपीएफ ने पिछले चार साल में ऐसे 131 बच्चों को रेलवे स्टेशन से पकड़ा है, जो माता-पिता के सख्त रुख और जरा सी बात पर घर से भाग जाते हैं। ऐसे बच्चों को आरपीएफ ने उनके घर तक सकुशल पहुंचा दिया है। तेजी से बढ़ते इस प्रकार के मामलों को देखकर अधिकारी भी हैरान हैं। आरपीएफ पोस्ट कमांडर चमन सिंह तोमर ने बताया कि स्टेशन पर अकेले बच्चों की निगरानी के लिए एक टीम लगाई गई है। उसका काम सिर्फ ऐसे बच्चों की निगरानी करना है, जो प्लेटफार्म या ट्रेन में अकेले होते हैं।
केस-1
पिता ने पिटाई की धमकी तो बच्चे ने घर छोड़ा
10 अगस्त 2020 को क्वार्सी थाना क्षेत्र का 14 साल के बच्चे की पड़ोस के बच्चे से लड़ाई हो गई। इस पर पिता द्वारा उसको पिटाई लगाने की धमकी दी गई तो वह घर छोड़कर भाग गया। उसे रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ कर्मियों ने पकड़ा। पूछताछ में उसने पूरी बात बताई तो उसके मां-पिता को बुलाकर काउंसिलिंग की गई।
केस-2
घर छोड़कर भागा, फिर अपहरण की कहानी बनाई
4 अप्रैल 2021 को बिहार के दरभंगा जिले से किशोर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में सवार होकर अलीगढ़ आ गया। यहां जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने उसे पकड़ा तो उसने अपहरण की कहानी बना दी। पूछताछ के बाद किशोर ने पढ़ाई के दबाव के चलते घर छोड़ने की बात स्वीकारी।
ये होता है कंडक्ट डिसऑर्डर
स्वास्थ्य विभाग की साइको थेरेपिस्ट (पीएसडब्ल्यू) अंशु सोम ने बताया कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे कंडक्ट डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं। उनके पास ओपीडी में औसतन हर सप्ताह दो बच्चे पहुंच रहे हैं। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे झूठी कहानी बनाते हैं, गुस्सैल स्वभाव के हो जाते हैं। अगर, वह किसी चीज को चाहने लगे तो उसे पाने के लिए हर हद तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा नशे की ओर भी आकर्षित होने लगते हैं। इसके पीछे का कारण आज के समाज में अभिभावकों के पास बच्चों के लिए समय का न होना है। संयुक्त परिवार में बच्चों को जो माहौल मिलता है, वह मिल नहीं पा रहा है। माता-पिता की बच्चों से कम बातचीत होती है। इससे बच्चों और अभिभावकों के बीच बचपन से ही एक दूरी बन जाती है। उनकी निगरानी ठीक से नहीं हो पा रही है। बच्चों को सही गलत का फर्क नहीं समझाया जाता है। साथ ही छोटे बच्चों पर पढ़ाई का दबाव माता-पिता की ओर से बनाया जाता है। बच्चा अगर पढ़ाई में कमजोर है तो उसे नजरअंदाज करने लगते हैं। इससे बच्चे अवसाद का शिकार होने लगते हैं। वहीं, बच्चे टीवी, मोबाइल में देखे गए कंटेंट से तेजी से प्रेरित होते हैं और खुद भी उस आभासी दुनिया का हिस्सा बनना चाहते हैं, जो कि उनको गलत राह पर ले जाती है।
अभिभावकों को सलाह
- बच्चों को गलती करने पर समझाएं, छोटी-मोटी सजा का सहारा लें।
- बच्चों को अधिक समय दें, उनके दिल की बात सुनें।
- बच्चों को प्यार करें लेकिन जिद्दी न बनाएं।
- बच्चे को कभी ऐसा महसूस न होने दें कि वह अभिभावक के ऊपर हैं।
- बच्चों को खराब संगत से दूर रखें।
आरपीएफ द्वारा स्टेशन पर पकड़े गए बच्चों का आंकड़ा
वर्ष बालक बालिका कुल
2017 35 12 47
2018 08 04 12
2019 42 06 48
2020 14 07 21
2021 04 00 04