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बने पुल तो बढ़े मेल-मिलाप, फले-फूले गंगीरी का कारोबार

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नाव के सहारे काली नदी पार करते लोग। - फोटो : GANGIRI
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इधर शादीपुर और उधर गुरेठा के बीच में बह रही काली नदी पर पुल बन जाए तो नदी के दोनों ओर के गांवों की किस्मत बदल जाएगी। आवागमन की दूरियां कम हो सकेंगी। मेेल-मिलाप बढ़ेंगे। सिकंदराराऊ, हाथरस से लेकर एटा तक से गंगीरी क्षेत्र का सीधा संपर्क हो जाएगा। इससे शादीपुर समेत गंगीरी तक का व्यापार बढ़ेगा। लोगों को आर्थिक फायदा भी हो सकेगा।
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एक दशक से ऊपर हो गया। शादीपुर समेत क्षेत्र के निवासी काली नदी पर पुल की गुहार लगाते आ रहे हैं। वर्ष 2011 में हाथरस जनपद में पड़ने वाले गांव गुरेठा के काली नदी स्थित सुल्तानपुर घाट पर पुल निर्माण की प्रक्रिया एक बार शुरू भी हुई। 6 करोड़ 52 लाख रुपये खर्च कर सेतु निगम को पुल निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। कछुआ गति से काम शुरू हुआ। वर्ष 2017 में पुल निर्माण के लिए मिट्टी की जांच और दूरबीन सर्वे के बाद नेताओं की आपसी खींचतान में यह काम रुक गया। गुरेठा ग्रामसभा के पूर्व प्रधान होती सिंह कहते हैं कि काफी मेहनत कर ग्राम पंचायत के सुल्तानपुर घाट पर काली नदी में पुल निर्माण की स्वीकृति करवाई थी, लेकिन नेताओं, विधायकों ने पुल नहीं बनने दिया। गुरेठा क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के निवासी गंगीरी कस्बे के बाजार व छर्रा अनाज मंडी जाने-आने के लिए नावों के सहारे हैं। वाहनों से गंगीरी, छर्रा क्षेत्र जाने-आने में 19 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। काली नदी पर पुल बन जाए तो गंगीरी की दूरी महज 3 किलोमीटर रह जाएगी। गुरेठा सुल्तानपुर निवासी सरजन सिंह कहते हैं कि काली नदी पर पुल बनने से हाथरस जनपद के एक दर्जन गांव के निवासियों की बड़ी परेशानी दूर होगी। उन्हें अभी गंगीरी, छर्रा पहुंचने के लिए 19-20 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है।
बारिश में नाव से नदी पार कराना खतरे से खाली नहीं
सुरेश चंद्र केवट निवासी गुरेठा सुल्तानपुर कहते हैं कि वह नौका के जरिए दोनाें ओर के निवासियाें को नदी के इस-उस पार पहुंचा रहे हैं। हालांकि जब बारिश का मौसम होता है तब नौका से नदी पार कराने में हादसे का खतरा बढ़ जाता है। कभी-कभी तो बाढ़ आने पर नाव भी बह जाती है।
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नहीं डाला था वोट, लौटाई थीं खाली ईवीएम
वर्ष 2017 में मिट्टी की जांच व दूरबीन सर्वे के बाद भी पुल निर्माण न होने से नाराज गुरेठा सुल्तानपुर व लछिमपुर गड़िया समेत काली नदी के आसपास वाले अन्य गांवों के निवासियों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। डीएम, एसएसपी व नेताओं के समझाने पर भी वोट नहीं डाले थे। सभी गांवों से खाली ईवीएम लौटाई गई थी। इसके बाद काली नदी पर पुल बनने से पहले छर्रा विधायक व सिकंदराराऊ विधायक ने हिदरामई में काली नदी पुल की दूरी चार किलोमीटर बता कर काम रुकवा दिया था, जबकि हिदरामई पुल से गुरेठा घाट की दूरी दस किलोमीटर है।
इधर जिले के गांव शादीपुर निवासी
मुसाहिद खां ने बताया कि अगर काली नदी पर पुल बन जाए तो हमारा जिला हाथरस में रिस्तेदारियों में जाने के लिए 12 किलो मीटर का फेर बच जायेगा और परेशानी दूर हो जाएगी।
विक्रम सिंह रावत ने बताया कि काली नदी पर पुल बन जाए तो गांव शादीपुर व कसबा गंगीरी व चौराहे की किस्मत जाग जाएगी और आमंदनी काफी बढ़ जाएगी। हाथरस व एटा सिंकदराराऊ जाने के लिए कई किलोमीटर का फेर बचेगा और दो जिलों के लोगों का आना जाना मिलना झुलना शुरू हो जायेगा।
अजीत सिंह रावत ने बताया कि काली नदी पर पुल बनने से दोनों जिलों के गांव के लोगों को जो आ रही परेशानियां दूर हो जाएंगी। नाव द्वारा नदी को पार किया जाता है कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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