तहसील अतरौली क्षेत्र में खेती योग्य जमीन में जीवांश कार्बन और पोटाश कम हो रहा है। तहसील से प्रयोगशाला भेजे गए करीब 4400 मिट्टी के नमूनों की जांच में इसका खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंधाधुंध डीएपी का प्रयोग खेतों की उर्वरा शक्ति कमजोर कर रहा है। किसानों को डीएपी के साथ दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहिए। अब पुन: 4200 नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की तैयारी है। उपजाऊ जमीन की उर्वरा शक्ति जांचने के लिए कृषि विभाग द्वारा मिट्टी का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। चार माह पहले विभाग ने जांच के लिए 4400 नमूने भेजे थे।
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जीवांश कार्बन को मृदा कार्बनिक कार्बन (सायल आर्गेनिक कार्बन-एसओसी) के रूप में भी जाना जाता है। यह मृत पौधों और जानवरों के अपशिष्ट से बनता है। इससे ही मिट्टी की उर्वरता, जल धारण क्षमता और संरचना बेहतर होती है।
डीएपी जमीन को बनाती है ठोस
एडीओ नेत्रपाल सिंह ने बताया कि किसान डीएपी का प्रयोग खेतों में छिड़काव विधि से करते हैं। पौधा अपने पास पहुंची डीएपी को ही ग्रहण करता है। इस तरह करीब 70 प्रतिशत डीएपी खेत में ही बेकार पड़ी रहती है। यही डीएपी जमीन को ठोस बना देती है।
अन्य विकल्पों पर ध्यान दें किसान
कृषि विभाग के वरिष्ठ सहायक तालेवर सिंह ने बताया कि किसानों को इस वक्त पीएसवी कल्चर 10 किलो बीज में मिलाकर खेतों में डालना चाहिए। यह डीएपी को घुलनशील स्थिति में लाती है। पीएसवी कल्चर ब्लॉक पर मौजूद है। इसके अलावा अन्य कई विकल्प हैं, जिन्हें किसान ब्लॉक से प्राप्त कर सकते हैं।
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फसल चक्र बदलें किसान
एडीओ ने बताया कि किसान फसल चक्र बदलें। साल में एक बार दलहन अवश्य पैदा करें। दलहनी फसल के पत्ते खेतों में गिरकर जरूरी बैक्टीरिया को सक्रिय करते हैं। खेतों में साल में एक बार हरी खाद अवश्य बनानी चाहिए। यह उर्वरा शक्ति बढ़ाती है। किसान गोबर और कूड़ा करकट एकत्र कर खाद (घूरा) तैयार करते हैं। इसको हमेशा गड्ढा खोदकर तैयार करें। समय-समय पर थोड़ा यूरिया भी घूरे पर डालते रहें, यह अवशेषों को जल्द गलाने का काम करता है। मवेशियों का मूत्र और अन्य अवशेष भी घूरे पर डालें। यह बैक्टीरिया को सक्रिय करता है।
प्रयोगशाला में उपकरण खा रहे धूल
उप निदेशक कृषि कार्यालय अतरौली में मिट्टी की जांच के लिए उपकरण मौजूद हैं। पहले यहां मिट्टी की जांच होती थी, लेकिन वर्तमान में अलीगढ़ में ही मिट्टी की जांच होती है। किसान गिरीश चौधरी, रामभान सिंह, शिवकुमार शर्मा, उदयपाल राघव आदि ने मांग की है कि अतरौली में ही मिट्टी की जांच होनी चाहिए।
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