टोड़ी सिंह की संपत्ति की लड़ाई 40 वर्ष चली। इस बीच टोड़ी सिंह (70) स्वर्ग सिधार गए। उनके बेटों ने मोर्चा संभाला। अब 40 वर्ष बाद अदालत का निर्णय आया है कि खुद के द्वारा बनाए गए मंदिर की जिस भूमि के लिए टोड़ी सिंह ने लड़ाई शुरू की वह भूमि उन्हीं की थी। अदालत का निर्णय आने के बाद परिवार में खुशी है।
टोड़ी सिंह के नाती कुलदीप सिंह व टोड़ी सिंह के पुत्र गौरीशंकर बताते हैं कि अनूपशहर रोड जमालपुर माफी में उनके पूर्वजों की संपत्ति है। इस पर उनके पिता टोड़ी सिंह ने एक हिस्से में मंदिर व कमरे का निर्माण कराया। बाद में इलाके के ही कुछ लोग साजिश रचकर उस भूखंड को अपना बताते हुए उस पर कब्जे को प्रयासरत हो गए। कई बार कोशिश की। कुछ लोगों की मध्यस्थता पर मामला शांत हुआ। बाद में उन लोगों ने फिर प्रयास किए।
जब बात नहीं बनी तो टोड़ी सिंह ने 1985 में सिविल न्यायालय में वाद दायर कर दिया। इसमें कुल 13 आरोपी बनाए गए। मुकदमा लड़ते समय 1996 में 70 वर्ष की आयु में टोड़ी सिंह का देहांत हो गया। पांच आरोपियों का भी देहांत हो गया। अब आकर अदालत में यह साबित हुआ कि यह भूखंड टोड़ी सिंह का ही था। इसी आधार पर 19 जुलाई को अपर सिविल जज कनिष्ठ प्रभाग की अदालत से सभी आरोपियों के खिलाफ वाद डिक्री किया है। इस भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा या निर्माण प्रतिबंधित कर मुकदमा खत्म किया है। इस विषय में कुलदीप बताते हैं कि अब तक मंदिर की देखरेख नहीं होती थी। लोग पूजा अर्चना जरूर करते थे। अब वहां देखरेख भी शुरू की जाएगी।