मलखान सिंह जिला अस्पताल में भीषण गर्मी के आगे अस्पताल प्रशासन लाचार है। बुधवार की रात दो बच्चियों की मौत होने के बाद अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ।
गुरुवार सुबह ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. गीता प्रधान अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचीं। उन्होंने अस्पताल की स्थिति पर चिंता जताई।
उन्होंने बताया कि यह बेहद शर्मनाक बात है कि एक बच्ची की तबियत बिगड़ने पर पहले उसे मेडिकल रेफर किया गया था लेकिन ज्यादा तबियत खराब हुई तो परिजन उसे अस्पताल ले आए। लेकिन यहां पर आक्सीजन लगाने के लिए स्टाफ ही नहीं था। भीषण गर्मी में व्यवस्थाओं को परखने के लिए ही डीडी अस्पताल में सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल ने निरीक्षण किया।
दो दिन पहले ही मलखान सिंह जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती तीन वर्षीय बच्ची की हीट स्ट्रोक के चलते मौत हो गई थी।
इसी दिन बन्ना देवी की रहने वाली एक महिला फूलवती की भी हीट स्ट्रोक से मौत हुई। इसके बाद लगा कि अस्पताल प्रशासन हरकत में आ जाएगा और कम से कम गर्मी के कारण बिगड़ रही मरीजों की हालत के लिए कुछ करेगा। लेकिन बुधवार की रात को एक बार फिर से दो बच्चियों की मौत का मामला प्रकाश में आया है। इन दोनों बच्चियों की सीधे इमरजेंसी में ही लाया गया था। इनमें से एक को मेडिकल कालेज भेजा गया था लेकिन उसके परिजन रास्ते से ही फिर से जिला अस्पताल आ गए थे। गुरुवार को निरीक्षण के दौरान एडी हेल्थ को वहां मरीजों ने बताया कि बिजली जाने पर जेनरेटर नहीं चलाया जाता है, जिससे गर्मी में स्थिति बहुत खराब हो जाती है।
निरीक्षण में मिला सिर्फ 60 फीसदी स्टाफ
अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. गीता प्रधान को गुरुवार सुबह 8.30 बजे जिला अस्पताल पहुंचने पर 60 फीसदी ही स्टाफ मिला। उन्होंने स्टाफ को चेतावनी दी कि भविष्य में समयबद्धता का ध्यान नहीं रखा गया, तो वेतन काटने की कार्रवाई होगी। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जतायी। गर्मी को देखते हुए अस्पताल में पेयजल व्यवस्था को सुचारु करने के निर्देश दिए।