एएमयू में ओलंपिक साइज स्वीमिंग पूल के निर्माण में जनरल फाइनेंस रूल्स 2005 का उल्लंघन किया गया है। आश्चर्य की बात यह भी है कि एएमयू प्रशासन ने बिना भवन एवं वित्त कमेटी की स्वीकृति के स्वीमिंग पूल का निर्माण कार्य शुरू करा दिया और नोएडा के निर्माण एजेंसी को 317.52 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। कार्यालय प्रधान निदेशक लेखा परीक्षा (के) ने 2015-16 के ऑडिट में इसे उजागर किया है।
लूलू ग्रुप के प्रमुख एनआरआई (नॉन रेजीडेंट इंडियन) यूसुुफ अली ने स्वीमिंग पूल के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये दान दिए थे। कुल अनुमानित लागत करीब 7.25 करोड़ रुपये थी। शेष धनराशि दूसरे दान दाताओं ने दिये। एएमयू को दानदाता ने 1 अक्टूबर 2014 को धन उपलब्ध करा दिया जबकि काम करीब 9 महीने बाद 15 जून 2015 का प्रारंभ हुआ और ठेकेदार को 317.52 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। वह भी बिना भवन एवं वित्त कमेटी की स्वीकृति के।
भवन कमेटी ने 26 जुलाई 2016 और वित्त कमेटी ने दिसंबर 2016 में स्वीकृति प्रदान की। आडिट में परामर्शदाता को 18.85 लाख के अनावश्यक भुगतान पर भी सवाल उठाया गया है। इस संबंध में एएमयू गेम्स कमेटी के सचिव प्रो. शुएब जहीर का कहना है कि मुझे ऑडिट के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। एक महीने पहले भवन विभाग ने उन्हें स्वीमिंग पूल सौंपा है। उसके पहले क्या हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उल्लेखनीय है कि नवनिर्मित ओलंपिक साइज स्वीमिंग पूल का उद्घाटन पिछले महीने हुआ था।