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छा गई खामोशी: लोकेश-नारायणी हाजिर हों, कोर्ट में आज भी लगती है पुकार, दोनों गए स्वर्ग सिधार

Thu, 03 Sep 2026 12:32 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

इस पूरे मुकदमे में अब एकमात्र जीवित आरोपी बचे हैं ससुर श्योराज। करीब 80 वर्ष की उम्र के पड़ाव पर पहुंच चुके श्योराज इस ढलती उम्र में भी अकेले अदालत की तारीख पर पहुंच रहे हैं।
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कोर्ट - फोटो : एआई
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विस्तार
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अदालत में तारीख लगी। पेशकार ने आवाज लगाई-लोकेश... नारायणी देवी... श्योराज हाजिर हों। इसके बाद कमरे में कुछ पल की खामोशी रही। वहां मौजूद अधिवक्ता और कुछ लोग एक-दूसरे की तरफ देखने लगते हैं। अधिवक्ता ने बताया कि पुकारे गए तीन नामों में से दो अब सिर्फ फाइलों में हैं।

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लोकेश की मौत को नौ साल हो चुके हैं। उसकी मां नारायणी देवी भी वर्ष 2023 में दुनिया छोड़ चुकी हैं। जिंदा हैं तो सिर्फ 80 साल के श्योराज। वह आज भी अदालत की तारीख पर पहुंच रहे हैं। यही नहीं जिस महिला की शिकायत पर यह मुकदमा शुरू हुआ, वह भी पिछले 12 साल से अदालत नहीं पहुंची है। यानी अदालत में एक तरफ मृत आरोपियों के नाम पुकारे जा रहे हैं, दूसरी तरफ वादी की गैरहाजिरी के बीच मुकदमा आगे बढ़ रहा है।

मामला वर्ष 2014 का है। बन्नादेवी क्षेत्र की लता की शादी देहली गेट निवासी लोकेश से हुई थी। कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया। वर्ष 2016 में लता ने अदालत में परिवाद दाखिल किया। पति लोकेश, सास नारायणी देवी और ससुर श्योराज पर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। फिर समय ने इस मुकदमे की कहानी ही बदल दी। वर्ष 2017 में लोकेश की मौत हो गई। बेटे की मौत के कुछ साल बाद नारायणी देवी का भी वर्ष 2023 में निधन हो गया, लेकिन दोनों की मौत की सूचना अदालत की फाइल तक समय पर नहीं पहुंची। इसलिए कागजों में वे आज भी आरोपी हैं और तारीख आने पर उनके नाम की पुकार भी हो जाती है।

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अब सिर्फ बुजुर्ग ससुर ही लड़ रहे कानूनी लड़ाई
इस पूरे मुकदमे में अब एकमात्र जीवित आरोपी बचे हैं ससुर श्योराज। करीब 80 वर्ष की उम्र के पड़ाव पर पहुंच चुके श्योराज इस ढलती उम्र में भी अकेले अदालत की तारीख पर पहुंच रहे हैं। न्यायपालिका की फाइलों में धूल फांक रहे इस अनोखे मामले की अगली सुनवाई अब सिविल जज जूनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 के न्यायाधीश मो. फरहान की अदालत में 26 सितंबर को तय की गई है।

जांच अधिकारी अदालत में पेश करते हैं रिपोर्ट
विधि के जानकार दिनेश कुमार कहते हैं कि मुकदमा ट्रायल के चरण में है और पुलिस को आरोपी की मौत की बात पता चलती है, तो पुलिस या जांच अधिकारी अदालत में अपनी रिपोर्ट या तस्दीकशुदा जानकारी पेश करते हैं। जब अदालत में कानूनी रूप से यह पुष्टि हो जाती है कि आरोपी की मौत हो चुकी है, तो उस मृत आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया जाता है। इस मामले में अदालत तक आरोपियों की मौत की सूचना ही नहीं पहुंच सकी।
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