शहर में डेंगू, चिकुनगुनिया और मलेरिया आदि के प्रकोप के बीच ही अफवाहों का माहौल भी बना हुआ है। जरा सा भी बुखार आने पर लोग उसे डेंगू ही समझ ले रहे हैं। इसके चलते कुछ नर्सिंग होम मनमानी कर रहे हैं और डेंगू के नाम पर और उसके उपचार के नाम पर मनमाने पैसे ऐंठ रहे हैं।
इन सबके बीच रविवार को डीडी अस्पताल में डेंगू संभावित एक मरीज आशीष कुमार और पहुंचा है। उसकी इमरजेंसी में सभी प्रकार की जांच की गई हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. यशपाल रावल ने डेंगू या अन्य मच्छर जनित संक्रामक रोगों के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें बताईं।
- सामान्यत हर बुखार में प्लेटलेट्स गिरती है। किसी भी तरह का बुखार होने पर लगातार पानी पीते रहें। अगर सादा पानी न पिया जाए तो नारियल पानी, शिकंजी, शरबत आदि पीते रहें। सबसे अधिक प्रयास बुखार के उतरने का करें। पानी की पट्टियां बदलते रहें।
- अगर डेंगू का टेस्ट पॉजिटिव आया है तो भी घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अगर लगातार पानी पिया जा रहा है और रोगी दो तीन घंटे में पेशाब कर रहा है तो चिंता की कोई बात नहीं है। बिना दवा के भी डेंगू और अन्य वायरल बुखार एक से डेढ़ हफ्ते में सही हो जाता है। बस जरूरत इस बात की है कि मरीज पानी पीता रहे।
- डेंगू में आमतौर पर खतरनाक स्थिति तब तक नहीं बनती जब तक रोगी को बुखार रहता है। असली खतरा बुखार उतरने के बाद बढ़ता है। जब रोगी लापरवाही से शारीरिक श्रम करने लगता है। इसलिए पूरा विश्राम करें। पानी लगातार पीते रहे। अगर बुखार के बाद रोगी उठने तक में असमर्थ महसूस कर रहा है, जोड़ों में दर्द हो रहा है तो तुरंत ही चिकित्सक की सलाह लें।
- अगर हाई ब्लडप्रेशर और लो ब्लडप्रेशर में से 40 से अधिक का अंतर आए, लगातार पेट में दर्द बना रहे, शरीर पर लाल चकत्ते बन रहे हों तब चिकित्सक से जरूर संपर्क करें। लेकिन इस अवस्था में भी अगर रोगी लगातार पानी पी रहा है और घंटे दो घंटे में पेशाब करने जा रहा है तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
- गिलोय की बेल करीब आठ इंच का टुकड़ा एक गिलास पानी में उबालें। पानी के आधा रहने पर रोगी को पिलाएं। अगर पीने में असुविधा हो रही है तो उसे शरबत मिला कर पिला दें। अवश्य फायदा होगा।
- डेंगू की कोई वैक्सीन नहीं बनी है। इसलिए किसी डाक्टर के पास पैसा और समय की बर्बाद न करें। अगर बुखार उतारने के लिए कोई अंग्रेजी दवा लेनी हो तो केवल पैरासीटामोल ही लें। अन्य कोई दवा न लें।