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साइबर हैकरों का बैंकर आगरा से गिरफ्तार, भाई चकमा देकर फरार, तलाश में जुटी पुलिस

Thu, 18 Feb 2021 01:14 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
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साइबर हैकर मनीष। - फोटो : अमर उजाला
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रेंज स्तरीय साइबर थाना पुलिस ने साइबर हैकरों के बैंकर को आगरा से गिरफ्तार किया है। यह हैकरों द्वारा ठगी जाने वाली रकम को इधर से उधर करने का काम अपने भाई के सहयोग से करता था। पुलिस जब उसे गिरफ्तार करने पहुंची तो उसका भाई मौके से चकमा देकर निकल गया। अब पुलिस उसके भाई की तलाश में लगी है।
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एएसपी/सीओ खैर विकास कुमार ने पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि साइबर थाने का पांचवां मुकदमा 6 नवंबर 2020 को वीना सागर पत्नी रामसागर निवासी साईं कृपा सुरेंद्र नगर क्वार्सी ने दर्ज कराया था, जिसमें आरोप था कि उनसे क्रेडिट कार्ड के विषय में जानकारी कर उनके खाते से 1.10 लाख रुपये पार कर दिए गए। जांच के दौरान साइबर थाना पुलिस ने योगेश कुमार उर्फ विदित पुत्र कुशलपाल निवासी फेस-2 जानकी विहार लाला मोहम्मदपुर रोड थाना कंकरखेड़ा मेरठ को चार फरवरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

उससे पूछताछ व उसके खातों की जांच में सामने आया था कि ये लोग मोबीक्विक पेमेंट वॉलेट से अपने खातों में रुपये मंगाते थे। इसके बाद अन्य खातों में रकम ट्रांसफर की जाती थी। जब पुलिस ने रकम ट्रांसफर होने वाले बैंक खातों की जांच की तो मनीष सविता पुत्र विनोद सविता निवासी सलेमपुर मुड़िया निबोहरा फतेहाबाद, आगरा व उसके भाई विष्णु का नाम सामने आया।
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जांच में पता चला कि मनीष सविता के मरैना फतेहाबाद केनरा बैंक शाखा के खाते में 15 दिन में 40 हजार रुपये की रकम पहुंची है। यह रकम योगेश द्वारा ट्रांसफर की गई थी, जबकि उसके भाई विष्णु के खाते में कई लाख रुपये पहुंचे हैं। इस आधार पर उसे गिरफ्तार कर बुधवार को जेल भेज दिया गया। इस गिरफ्तारी टीम में इंस्पेक्टर साइबर थाना सुरेंद्र सिंह व उनके सहयोगी शामिल रहे।

पचास फीसदी मुनाफे पर करते थे काम
एएसपी विकास कुमार ने बताया कि ये लोग लंबे समय से इस ग्रुप से जुड़े थे। पूछताछ में स्वीकारा है कि यह लोग जितनी रकम खुद के खाते में आती थी, उसका 50 फीसदी अपने पास रखते थे। शेष रकम को योगेश विदित के उसके दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देता था।

मोबाइल नंबर पोर्ट कराने से पहले दबोचा गया
इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी दोनों भाइयों के विषय में पुलिस को सिर्फ मोबाइल नंबर मिला था। सर्विलांस की मदद से उन तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा था। इसी बीच पता चला कि मनीष ने अपना मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के लिए आवेदन किया है। गनीमत कि उससे पहले पुलिस पहुंच गई और दबोच लिया। अगर नंबर पोर्ट हो जाता तो पकड़ने में मुश्किल होती।

आरोपी का भाई रैकेट का सदस्य
पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि पकड़े गए आरोपी मनीष का भाई विष्णु इस रैकेट का पुराना हिस्सा है। मनीष नया जुड़ा है। विष्णु पहले से इस धंधे को करता रहा है। उसके कई एकाउंट रैकेट में सामने आ रहे हैं।
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