ऐसे छह लेयर में काम कर रहा गिरोह
- एक टीम बॉस स्तर की है जो हांगकांग के बॉस से इंडिया हेड को निर्देश देकर टेलीग्राम के जरिये लोगों को जोड़ने, काम समझाने, कुछ लोगों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजने, कमीशन आधारित वेतन तय करती है।
- दूसरी टीम 50 वर्ष से अधिक आयु वाले अधिकारी, सेवानिवृत्त अफसर, बड़े व्यापारियों के खातों, वित्तीय लेनदेन, सोशल मीडिया अकाउंटों का डेटा जुटाकर गिरोह को देती है। इसमें कितने लोग हैं, अंदाजा नहीं।
- तीसरी टीम डेटा वाले नंबरों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें जोड़ती है। फिर उन्हें 200 से 300 गुना मुनाफे के लालच में फंसाया जाता है। उन्हें एक एप में खाते खुलवाकर उसमें रकम लगाने के लिए प्रेरित करती है।
- चौथी टीम का काम बैंक खातों में रकम आने पर उन्हें इधर से उधर करने, यूएसडीटी खरीदने, इंडिया हेड को अपडेट देने के साथ-साथ पूरा बहीखाता अपडेट रखना होता है।
- पांचवीं टीम का काम खाते जुटाने व खाता धारकों को ठगी के समय भरोसे में लेकर साथ रखने या साथ न होने पर रुपये ट्रांसफर करने वाली टीम के संपर्क में रहकर रकम इधर -उधर कराने का होता है।
- छठवीं टीम का काम होता है खाते व मोबाइल सिम जुटाने का। जिनके जरिये नए खाते खोलने से लेकर खातों के जरिये ठगी की रकम इधर-उधर करने व सिम से कॉल करने का काम होता है।
दो दर्जन व्हाट्सएप ग्रुप के विवरण मिले
एसपी देहात अमृत जैन बताते हैं कि सौरभ नाम का यह सरगना गंभीर बीमारी से ग्रसित है। अस्पताल में भर्ती है। इसलिए उसे टीम ने अभी छोड़ रखा है। वह लगातार पुलिस निगरानी में है। इसके अलावा इससे ऊपर इंडिया हेड के विषय में काफी कुछ मिला है। इसके अलावा दो दर्जन करीब ऐसे लोग हैं, जो व्हाट्सएप ग्रुप ऑपरेट करने से लेकर खातों से रकम ट्रांसफर कर रहे थे। उनका विवरण मिल गया है। इन सभी पर साइबर टीमें काम कर रही हैं। वहीं, हांगकांग से ऑपरेट हो रही एप, व्हाट्सएप ग्रुप व कॉलिंग नंबर आदि के लिए सीबीआई को इंटरपोल के लिए लिखा जा रहा है।
ताला कारोबार के टर्नओवर से बड़ी ठगी, कहां गई रकम
साइबर पुलिस टीम ने इस खुलासे में पाया कि इस गिरोह ने पिछले कुछ माह में 5000 करोड़ से ज्यादा की ठगी की है। 1200 करोड़ की ठगी छह फरवरी को होने से बचा ली है। यह रकम अलीगढ़ के ताला हार्डवेयर कारोबार के सालाना टर्न ओवर से कहीं अधिक है। ऐसे में सवाल यही है कि ये रकम कहां गई। दूसरा अनुमान ये भी है कि आज भी ये धंधा जारी होगा। कहीं, दूसरे ग्रुप दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे होंगे। खुलासे में उजागर हुआ है कि ठगी की रकम से यूएसडीटी खरीदी जा रही है। यह खरीदकर कहां भेजे जा रहे या किसके पास खरीदे जा रहे। ये अभी उजागर होना बाकी है। अंदेशा विदेशी फंडिंग का है।
हैकरों की तर्ज पर पुलिस सक्रिय
एसपी देहात अमृत जैन बताते हैं कि इस खुलासे के साथ एक साइबर टीम को 50 आयु वर्ग से ऊपर वाले व्यापारी वर्ग व अफसर वर्ग व सेवानिवृत्त वर्ग के लोगों की सूची बैंकों से मांगी गई है। उस सूची के अनुसार लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे किसी तरह के लालच या बहकावे में न आएं।