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पश्चिम से सिम बिके, पूर्वांचल से खाते..जमताड़ा से ठगी और बंगलूरू में रुपये निकाले

Fri, 08 Jan 2021 12:51 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
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आरोपियों से बरामद सामान - फोटो : अमर उजाला
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ऑनलाइन ठगी का खेल अनोखा है मगर संगठित है। ऑनलाइन कामकाज करने वालों की जरा सी लापरवाही या अनदेखी का यह संगठित साइबर हैकर गिरोह लाभ उठाता है। बृहस्पतिवार को रेंज स्तरीय साइबर थाना टीम ने जो खुलासा किया है, उसमें कुछ ऐसे ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह गिरोह देश के अलग-अलग कौनों में बैठा है और 40 लोगों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर ऑपरेट होता है। गिरोह का जो अहम सदस्य पकड़ा गया है, वह ठगी के लिए प्लेटफार्म तैयार करता है। जिसमें उसे महारथ हासिल है। यह प्लेटफार्म तैयार करने के लिए उसे पश्चिमी यूपी से ही सिम मिलती हैं और उन्हें वह पूर्वांचल के महाराजगंज ले जाकर फर्जी पेटीएम बैंक एकाउंट बनाता था।
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ऑनलाइन बिल जमा करते करते यूट्यूब पर सीखा तरीका

पकड़े गए अफरोज अब्बासी के विषय में मिली जानकारी के अनुसार वह स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। उसके पिता की महाराजगंज में चश्मे की दुकान है। वह शुरुआत में अपने पिता की दुकान पर ही बैठकर लोगों के बिजली के बिल ऑनलाइन जमा करता था। इसी दौरान 2017 में यूट्यूब पर सर्च करते-करते वह रेफर एंड अर्न कैश बैक ऑफर चैनल से जुड़ गया। इसमें ऑनलाइन लेनदेन पर ओटीपी, आफर लिंक आदि आता था और रुपये कमाने के संबंध में था। ऐसा करने से उसे रुपये मिले तो वह लोगों को लिंक रैफर करने लगा। इसी बीच उसकी पहचान ऑनलाइन ही इस साइबर हैकिंग गिरोह के कुछ लोगों से हुई और वह उनके व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ गया। शुरुआत में उसने अपने यहां बिल जमा कराने आने वाले के बिजली बिल की डुप्लीकेट कॉपी से सिम लेना शुरू किया।

दो हजार में बेचा एकाउंट, फिर लिया कमीशन

व्हाट्सएप ग्रुप में उसके साथी बढ़े और जमताड़ा तक उसकी पहुंच हो गई। इसी बीच उससे फर्जी प्लेटफार्म यानी फर्जी एकाउंट बनाने का ऑफर आया। इस पर उसकी सिम की डिमांड बढ़ी तो उसने पश्चिमी यूपी के एक जिले के एक युवक से संपर्क किया। इस युवक ने उसे फर्जी आईडी पर सिम मुहैया कराना शुरू किया। इसके लिए बाकायदा वह गोरखपुर से कार से लखनऊ और वहां से हवाई मार्ग से दिल्ली जाता। पश्चिमी यूपी का युवक दिल्ली में उसे सिम लाकर देता। उन सिम के जरिये वह फर्जी एकाउंट बनाकर उन्हें दो-दो हजार रुपये में बेचता था।
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ऐसे होती हैकिंग से ठगी तक की पूरी प्रक्रिया

युवक ने पूछताछ में स्वीकारा कि पश्चिमी यूपी का युवक सिम बेचने का धंधा करता है। वही अपने पास आने वाले ग्राहकों की आईडी व उनके थंब इंप्रेशन का दुरुपयोग कर सिम एकत्रित करता था। आलम यह था कि एक-एक नाम पर चार से पांच सिम तैयार होती थीं। एक सिम पर पेटीएम एकाउंट बनाने के लिए पैन नंबर की जरूरत पड़ती थी। सिम देने वाला उसे सिम के साथ सिम धारक के नाम की सूची भी देता था। पकड़ा गया आरोपी सिम धारक के नाम से पेन-टेन नाम ऑनलाइन डोमिन पर पेन नंबर तलाशता और उसी सिम व पेन नंबर के जरिये फर्जी पेटीएम बैंक एकाउंट तैयार करता था। साथ में खुद ही थंब इंप्रेशन आदि की मदद से केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करता था।

दो घंटे में ऐसे रुपये होते थे पार

जैसे ही यह पेटीएम बैंक एकाउंट ऑनलाइन ठग खरीदते तो वह जिसे ठगते थे, उसका रुपया जमताड़ा में बैठकर इस फर्जी एकाउंट में ट्रांसफर करते। यहां रुपया आते ही उसे चंद मिनटों में आगे बंगलूरू या महाराष्ट्र के दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता। वहां उनके गिरोह का सदस्य तत्काल एटीएम से रुपये निकाल लेता था। बंगलूरू व महाराष्ट्र में रिक्शा चालकों या भिखारियों के बैंक खाते पहले से खुलवाकर तैयार रखे जाते हैं। अगर रकम ज्यादा होती है तो उसके लिए बाकायदा कंपनी एकाउंट तैयार किया जाता है, क्योंकि कंपनी एकाउंट में दिन भर में रुपये के लेनदेन की कोई लिमिट नहीं होती। कुल मिलाकर जिसके साथ ठगी हुई, वह जब तक पुलिस के पास जाता और पुलिस हरकत में आती। तब तक रुपया उस खाते से गायब हो जाता, जिसमें पहुंचा है और वह खाता फर्जी होता था। साथ में जिस एटीएम खाते से निकाला गया, वह किसी गरीब के नाम से खुला था।

तीन महीने के प्रयास के बाद पकड़ा गया हैकर

आईजी के अनुसार डॉ. पल्लवी अग्रवाल की साइबर थाने में पहला मुकदमा 14 सितंबर को दर्ज किया गया था। तभी से टीम इस हैकिंग पर काम कर रही थी। काम करते-करते साइबर टीम को जब सफलता मिलती चली गई तो टीम ने यहां तक पहुंचकर पूरे रैकेट का भंडा फोड़ा। अभी पश्चिमी यूपी के सिम बेचने वाले सहित अन्य लोगों की तलाश जारी है।

यह काम भी बचे हैं रैकेट तक पहुंचने को

आईजी के अनुसार अभी इसमें फॉरेंसिक की मदद से यह पता करना है कि 40 लोगों के व्हाट्सएप ग्रुप में एडमिन कौन है। इस तरह के कितने और रैकेट चल रहे हैं। पकड़े के युवक के पास से जो चेक बुक व खाते की डिटेल मिली हैं, उन्हें सीज करा दिया गया है। बस यह पता करना बाकी है कि कितना लेनदेन तीन साल में हुआ है।

एक लाख रुपये महीने का खर्चा इस हैकर का

पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद जब इसके क्रेडिट कार्ड व अन्य खर्चों का ब्योरा जुटाया तो वह एक लाख रुपये प्रति माह से अधिक का था। यह बेहद महंगे शौक रखता है। आज तक कभी ट्रेन से दिल्ली नहीं आया। हर बार हवाई मार्ग से ही आया है।

एप क्लोनर से एक मोबाइल में 1500 एप, ओटीपी भी बेचे

ये ठग मोबाइल में एप क्लोनर रखता है, जिसके जरिये एक मोबाइल में 1500 एप चलाता है। जिसके जरिये ये छोटी मोटी ठगी के लिए ओटीपी बेचने का भी ध्ंांधा करता है। किसी को एक बार एकाउंट खोलने के लिए ओटीपी की जरूरत पड़ती है तो उस जरूरत को भी यह पूरा करता है।
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ये है साइबर ठगी का पूरा क्रम

महाराजगंज से साइबर हैकर फ्लाइट से सिम खरीदने आता था दिल्ली।
पश्चिमी यूपी के जिले का ही एक हैकर उसे मुहैया कराता रहा है सिम।
फर्जी आईडी पर खरीदी सिमों के जरिये तैयार किए जाते हैं फर्जी खाते।
ये खाते झारखंड के जमताड़ा में बैठकर ठगी करने वालों को बेचते जाते।
-जमताड़ा के हैकर ठगी कर रुपये पेटीएम खाते से बंगलूरू करते ट्रांसफर।
दो घंटे में ही रकम बंगलूरू में एटीएम के जरिये हैकर टीम निकाला लेती।

ये खास बातें भी जानें

1500 पेटीएम एप मोबाइल में थी सक्रिय
एक मोबाइल से कई एकाउंट भी रजिस्टर
1000 किमी दूरी के व्यक्ति से होती है ठगी
900 सिम से बनाए एकाउंट अब तक बेचे
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