अब साइबर सिंघम बनाने की तैयारी
अब प्रदेश स्तर पर यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की ओर से साइबर सिंघम तैयार किए जा रहे हैं। यह 500 साइबर सिंघम प्रत्येक जिले से चयनित कर प्रशिक्षण के लिए बुलाए जा रहे हैं। प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण के बाद जिलों में यह सभी को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें क्राइम सीन मैनेजमेंट, डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग और फॉरेंसिक एनालिसिस की गहन जानकारी दी जाएगी। इससे घटनास्थल पर साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और अपराध की सटीक जांच में मदद मिलेगी।
सामान्य ऑनलाइन प्रशिक्षण भी जारी
इसके अलावा प्रदेश से लेकर केंद्र स्तर तक साइट्रेन, कर्मयोगी, सीजीआईटी आदि नाम से कुछ ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रशिक्षण सभी पुलिसकर्मियों, सब इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टरों को दिए जाते हैं। इसके लिए क्रमवार शेड्यूल आते हैं, उसमें जिला स्तर से टीम को शामिल होने के लिए भेजा जाता है। इसमें अब तक अपने जिले से 80 फीसदी उप निरीक्षक व इंस्पेक्टर प्रशिक्षित हो चुके हैं। ये सामान्य जानकारियों संबंधी प्रशिक्षण होता है।
ये होंगे इनके काम
- साइबर कमांडो : किसी भी तरह के साइबर वार-हमला, साइबर संबंधी बड़ी घटना-हैकिंग आदि पर काम करेंगे।
- साइबर सिंघम : क्राइम सीन मैनेजमेंट, डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग और फोरेंसिक एनालिसिस करेंगे।
ये तथ्य भी जानें
- साइबर कमांडो गृह मंत्रालय ने देश भर में सिर्फ पांच हजार अलग-अलग फोर्स से बनाए।
- विशेष परीक्षा के तहत साइबर कमांडो चयनित किए गए। अब इनके प्रशिक्षण भी चल रहे।
- साइबर सिंघम प्रदेश में 500 बनाए जा रहे हैं, इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस से प्रशिक्षण।