मगरमच्छ का नाम सुनते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन युवती सुमन (19) का मगरमच्छ से आमना-सामना हुआ तो युवती की हिम्मत और साहस के आगे मगरमच्छ भी घबरा गया । काली नदी के सहारे घास काटते समय मगरमच्छ युवती का एक हाथ जबड़े में दबाकर नदी की ओर खींचने लगा। बहादुर बेटी ने भी हिम्मत नहीं हारी और शोर मचाते हुए दूसरे हाथ में लगी दरांती से मगरमच्छ की आंख पर हमला कर दिया। पास में ही घास काट रही युवती की चाची ने भी दिलेरी दिखाते हुए अपनी दरांती से मगरमच्छ की दूसरी आंख फोड़ दी। युवती को गंभीर हालत में सीएचसी से दीनदयाल अस्पताल रेफर कर दिया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
बुलंदशहर के थाना छतारी के गांव मोहिउद्दीनपुर के कुमरपाल सिंह मजदूरी करते हैं। 6 मई को दोपहर करीब 12:30 बजे उनकी बेटी सुमन अपनी चाची द्रोपा देवी (40) के साथ मोहिउद्दीनपुर व रायपुर मुजफ्ता के निकट काली नदी के किनारे चारा काट रही थीं। इसी दौरान अचानक नदी से करीब पांच फीट लंबा मगरमच्छ निकल आया, उसने सुमन पर हमला कर दिया और उसका हाथ जबड़े में दबाकर नदी की ओर खींचकर ले जाने लगा।
सुमन ने हिम्मत दिखाते हुए शोर मचाया और दरांती से उसकी आंख पर दरांती मारना शुरू कर दिया। इसी दौरान उसकी चाची द्रोपा भी वहां आ गईं और उन्होंने भी दरांती से मगरमच्छ की आंखों पर हमला कर दिया। दोनों ने हिम्मत नहीं हारी और आंख पर ताबड़तोड़ वार करने लगीं। इसके बाद मगरमच्छ युवती का हाथ छोड़कर नदी में वापस चला गया, तब तक सुमन के दोनों हाथ बुरी तरह जख्मी हो गए थे। सूचना पर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और युवती को आनन-फानन सीएचसी लेकर पहुंचे। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अवनेंद्र यादव ने बताया कि युवती के दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे रेफर कर दिया गया है।
ग्रामीण कर रहे चाची-भतीजी के हौसले की सराहना
गांव के लोग चाची-भतीजी की हिम्मत की सराहना कर रहे हैं। इतनी हिम्मत नहीं दिखातीं तो शायद घटना बड़ी हो सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी बढ़ने से मगरमच्छ भोजन की तलाश में अक्सर नदी किनारे आ जाते हैं। इससे पहले भी कई बार मवेशियों पर हमले हो चुके हैं। घटना के बाद से काली नदी किनारे बसे गांवों में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से काली नदी में बढ़ रहे मगरमच्छों को पकड़ने और किनारे फेंसिंग कराने की मांग की है।