इस घटना को लेकर ऋषि के पिता यानी रेनू के ससुर रामप्रकाश शर्मा की ओर से सीएम पोर्टल पर एक शिकायत की गई है, जिसमें जिला पुलिस के कुछ व जेल के कुछ अधिकारियों को नामजद आरोपी बनाया है। शिकायत में कहा है कि उनकी बहू पिछले कई साल से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी। बावजूद इसके साजिश के तहत उनकी बहू को जहरीली शराब कांड के एक मुकदमे में जेल भेज दिया गया।
इतना ही नहीं, जब 18 नवंबर को उसमें हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हो गई तो उसमें साजिश की एक धारा और बढ़ा दी गई। इस दौरान वह जेएन मेडिकल कॉलेज में भरती थी तो उसे 2 दिसंबर को जबरन डिस्चार्ज कराकर जेल ले आया गया। फिर मुख्य धारा व साजिश की धारा के जमानती के सत्यापन के नाम पर रिहाई टाली गई। जमानतियों के घर पहुंचकर पुलिस उन्हें डरा धमका रही थी। इसी क्रम में रात उसे मारकर जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। यह सब एक साजिश के तहत इन अधिकारियों ने जानबूझकर किया है। इनके खिलाफ उच्चस्तरीय जांच कराकर कार्रवाई की जाए।
जेल प्रशासन ने की न्यायिक जांच की संस्तुति
जेल के वरिष्ठ अधीक्षक विपिन मिश्रा की ओर से इस मामले में न्यायिक जांच की संस्तुति रिपोर्ट सीजेएम न्यायालय को भेज दी गई है। अब मामले में सीजेएम न्यायालय के स्तर से न्यायिक जांच के लिए जांच अधिकारी नियत किए जाएंगे। वह मामले में सभी तथ्यों पर जांच करने के बाद कार्रवाई पर रिपोर्ट देंगे।
बेटे ने कहा, पिता ने लगाए हैं आरोप
रेनू के बेटे विनय के अनुसार, इस मामले में उनकी जब उनके पिता से मुलाकात हुई है तो उन्होंने बताया कि जेल के लोग उन पर यह दबाव बनाते थे कि अपनी पत्नी को मेडिकल से डिस्चार्ज करवाकर वापस मेडिकल कॉलेज भेज दो। ऐसा क्यों कहा जा रहा था, यह तथ्य समझ में नहीं आ रहा है।
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सोशल मीडिया पर उठी सीबीआई जांच की मांग
इस घटना के बाद पूर्व ब्लाक प्रमुख का फोटो लगाकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दिन भर पोस्ट वायरल की जाती रहीं। सभी लोग एक स्वर में इस मौत की निंदा करते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि ये रिहाई से पहले मौत एक इत्तेफाक नहीं है। इसकी साजिश उजागर होनी चाहिए।
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पहले दो की मांगी फिर छह की मांगी पैरोल
रात में जब बरौली विधायक ठा. दलवीर सिंह मेडिकल पहुंचे तो उनके सामने परिवार की ओर से ऋषि शर्मा व कुनाल की पैरोल की बात रखी गई। इस पर सभी पक्षों की सहमति भी बन गई। इन्हीं दो को लेकर आवेदन भी दिया गया। मगर दोपहर में न्यायालय में परिवार के चार अन्य सदस्यों की पैरोल के लिए आवेदन न्यायालय में दिया गया।
जमकर लगे सरकार विरोधी, रेनू समर्थित नारे
धरने पर बैठे लोगों ने रेनू शर्मा को न्याय दो, झूठे मुकदमे वापस लो, ब्राह्मण एकता जिंदाबाद, योगी-मोदी मुर्दाबाद, पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के दिन भर नारे लगाए। इस दौरान कोई भी राजनेता आता तो लोग उसका विरोध भी करते।
जमानत खारिज है, इसलिए पैरोल न्यायालय का अधिकार
इस मामले में कानून कहता है कि वैसे सजायाफ्ता बंदियों को जिलाधिकारी के स्तर से पैरोल देने का अधिकार है। मगर जिन बंदियों की जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है और न्यायालय में मुकदमा लंबित है। ऐसे में उसी न्यायालय से पैरोल का अनुरोध किया जा सकता है, जिसमें मुकदमा लंबित है।
एंबुलेंस से होती थी पेशी
कारागार प्रशासन के अनुसार रेनू शर्मा के जमानत आवेदन के अनुसार और उससे पहले की जांच आदि के अनुसार उन्हें गुर्दा, दिल, न्यूरोलॉजिकल, शुगर आदि की गंभीर बीमारियां थीं। शुगर का स्तर 650 तक पहुंच जाता था। इसके चलते उन्हें 10 नवंबर को मेडिकल कॉलेज में भरती कराया था। हालत यह थी कि वह चलने व ज्यादा बोलने या सुनने में भी असमर्थ थीं। ऐसे में एंबुलेंस से ही उन्हें इधर से उधर लाया ले जाया जाता था। शुक्रवार देररात साढ़े 11 बजे सीने में दर्द व सांस लेने में परेशानी हुई तो पाया कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया है। इसलिए मेडिकल भेजा गया था।
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- इस परिवार को न्याय नहीं मिला। परिवार के नाम पर दुकानें ही नहीं थी। निर्दोष होने के बाद भी परिवार के लोगों को जेल में डाला गया। इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। - गुड्डू पंडित, पूर्व विधायक
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- शराब प्रकरण में कई निर्दोष फंसाए गए। जिनके नाम पर ठेके नहीं थे, उन्हें भी शराब कारोबारी बताया गया। इस पूरे प्रकरण की सीबीआइ जांच होनी चाहिए। रेनू शर्मा कई बीमारी से पीड़ित थीं। उन्हें बेहतर इलाज नहीं मिला और जबरन इस कांड में जेल रखा। इसकी जांच हो।-नरेंद्र शर्मा, बसपा नेता
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-यह वाकई बेहद गंभीर विषय है कि एक महिला जेल में है और गंभीर रूप से बीमार है। उसके इलाज में इस तरह की लापरवाही क्यों बरती गई। इस मामले में उच्चस्तरीय जांच कराकर सच सामने लाया जाए।-प्रमोद गौड़, पूर्व विधायक
-रेनू शर्मा की मौत पर मैं न्यायिक जांच की मांग करता हूं, जिससे कि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। मैं उन लोगों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग करता हूं जिन्होंने षड्यंत्र कर सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है।-नरेंद्र पचौरी, पूर्व जिपं सदस्य,जवां
-शराब कांड में पुलिस द्वारा जेल भेजी गईं पूर्व ब्लाक प्रमुख रेनू शर्मा के उपचार में कारागार में लापरवाही बरती गई है। इसी वजह से उनकी मौत हुई है। इस विषय को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।-शिवनारायण शर्मा, भाजपा जिला महामंत्री
- रेनू शर्मा की मौत का हम सभी को दुख है। अब क्यों, कैसे किन वजह से मौत हुई। यह तो जांच में साफ हो जाएगा। मौत पर जांच होगी। मगर विपक्ष के लोगों से अनुरोध है कि वे सियासत न करें।-गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष भाजपा
रात 10:30 बजे अंतिम संस्कार
जवां में देर रात शव पहुंचने के बाद रेनू के शव को देखने के लिए सैलाब उमड़ पड़ा। कुछ देर शव को घर रखकर अंतिम संस्कार की औपचारिकताओं के बाद शव शमशान ले जाया गया। जहां बेटे विनय ने मुखागिभन दी और अंतिम संस्कार किया गया।
ये बने पंचनामा के गवाह
- बेटा विनय शर्मा उर्फ बिट्टू, भाजपा उपाध्यक्ष गौरव शर्मा, भाजपा जवां मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश, भाजपा नेता सुधीर शर्मा, एक अन्य युवक सचिन शर्मा।
ये है डॉक्टरों का पैनल
पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में डॉ. मृदांग मिश्रा, डॉ. प्रवीन रंजन, डॉ. अनन्या पांडेय, डॉ. जितेंद्र व डॉ. करीम शामिल हैं। इनमें एक डॉक्टर जेएन मेडिकल कॉलेज से, एक दीनदयाल व एक मलखान सिंह से, एक महिला अस्पताल से हैं।
टाइमलाइन
-11:44 बजे शुक्रवार रात रेनू को जेल से मेडिकल कॉलेज लाया गया
-12:00 बजे रेनू की मौत की खबर परिवार, समर्थकों को मिली
-12:15 बजे मेडिकल कॉलेज में समर्थकों का जमा होना शुरू हुआ
-02:30 बजे बरौली विधायक दलवीर सिंह मेडिकल कॉलेज में पहुंचे
-03:00 बजे बरौली विधायक दलवीर सिंह जेल भी पहुंच गए
-05:00 बजे शनिवार सुबह शव को मेडिकल से पोस्टमार्टम गृह पहुंचाया गया
-07:00 बजे से पोस्टमार्टम गृह पर सियासी व समर्थक आने लगे
-08:00 बजे से पोस्टमार्टम गृह के सामने धरना भी शुरू हो गया
-01:00 बजे दोपहर सांसद ने पहुंचकर समझाने का विफल प्रयास किया
-02:30 बजे न्यायालय से पैरोल अर्जी खारिज होने की खबर आई
-04:00 बजे शाम ऋषि के बेटे को भाजपा नेता जेल अपने साथ ले गए
-06:30 बजे जेल से वापसी के बाद सभी से पोस्टमार्टम पर वार्ता
-07:30 बजे पंचनामा पर हस्ताक्षर, पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू
-09:00 बजे रात शव को पोस्टमार्टम गृह से गांव जवां ले जाया गया