टप्पल में मासूम बच्ची के हत्याकांड में पुलिस का फोकस अब चार्जशीट दाखिल करने पर है। इसके लिए गठित स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम यानी एसआईटी के विवेचकों का टप्पल में ही डेरा बना दिया गया है। जिससे विवेचना पूरी कर जल्द से जल्द इस मामले की चार्जशीट दाखिल कराई जा सके। पुलिस जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के पहले हफ्ते में इसकी चार्जशीट अदालत में दाखिल करने की तैयारी में हैै। जिससे जल्द से जल्द ये मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू कराया जा सके और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। गौर हो कि इस मामले के खुलासे के बाद अलीगढ़ दीवानी कचहरी के सभी वकीलों ने आरोपियों के पक्ष में पैरवी नहीं करने का एलान कर दिया है, जिससे आरोपी पक्ष की परेशानी और बढ़ गई है। फिलहाल इस मामले में चार आरोपी असलम, जाहिद, जाहिद की पत्नी साबुस्ता और उसका भाई मेंहदी हसन जेल में हैं।
जांच को सही दिशा में ले जाने के लिए एसएसपी आकाश कुलहरि ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला को अर्द्धशासी पत्र लिख कर ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह में बच्ची से संबंधित स्लाइड की जांच रिपोर्ट मांगी है। फारेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों की रिपोर्ट भी इसके साथ देने को कहा गया है। अब पुलिस को इन्हीं जांच रिपोर्ट का इंतजार है। एसआईटी के अधिकारी प्रमुख गवाहों की सूची तैयार कर रहे हैं जिनको अदालत में दौरान ए सुनवाई पेश किया जाना है। साथ ही कुछ गवाहों के चार्जशीट से पहले अदालत में बयान भी दर्ज कराए जा सकते हैं। सीओ ने बताया कि मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है।
टप्पल में सब कुछ रहा सामान्य, पुलिस पहुंची बच्ची के घर
बच्ची के परिवार में शुद्धि यज्ञ के बाद गुरुवार को कस्बे में माहौल पूरी तरह सामान्य रहा। कस्बे से पुलिस भी पूरी तरह हटा ली गई। हां, थाने पर जरूर कुछ अतिरिक्त फोर्स रही। दोपहर में पुलिस के अधिकारी सीओ के नेतृत्व में बच्ची के घर गए और वहां परिवार से मुकदमे को लेकर कुछ चर्चा की। इस दौरान गवाहों आदि को लेकर भी चर्चा हुई। इस दौरान परिवार की ओर से पुलिस से एक ही अनुरोध किया गया कि जो भी हो, वह जल्दी किया जाए।
हालात सामान्य हुए तो लौटने लगे समुदाय विशेष के परिवार
टप्पल में हुई मासूम बच्ची की हत्या के बाद पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल के बीच समुदाय विशेष के जो परिवार कस्बा छोड़कर चले गए थे, वे अब लौटने लगे हैं। इन लोगों का एक ही कहना है कि वह 65 साल से यहां रहते आ रहे हैं, मगर इस तरह का तनाव कभी देखने को नहीं मिला। वह पुलिस प्रशासन का शुक्र अदा करते हैं कि समय रहते हालात काबू कर लिए। करीब अठारह हजार की आबादी वाले इस गांव में करीब पांच हजार की संख्या में समुदाय विशेष की आबादी निवास करती है।
कस्बे का यह अनुपात आज से नहीं बल्कि आजादी के पहले ही चला आ रहा है। बच्ची की हत्या के बाद पैदा हुए हालात के चलते यहां से आरोपियों के घरों के इर्द-गिर्द रहने वाले समुदाय विशेष के लोग घरों को छोड़कर रिश्तेदारियों में चले गए थे। इसके बाद पुलिस प्रशासन की ओर से माहौल को सामान्य करने की दिशा में प्रयास हुए और अब कस्बे में माहौल सामान्य है। इसके बाद यह लोग वापस लौटने लगे हैं। घटना के चौदहवें दिन कस्बा के हालात पूरी तरह से सामान्य दिखे। बाजार पूरी तरह से खुला हुआ था। तो खरीददारी करने वालों की भी बाजार में भीड़ दिखाई दी। समुदाय विशेष के मोहल्लों में भी हालात सामान्य थे। इसे लेकर दुकानदार लाला, खिच्चू खां, यामीन खां आदि से बात हुईं तो यही बोले कि अब सब ठीक है। प्रशासन का शुक्र है। वरना 65 साल में ऐसे हालात नहीं देखे थे।
टप्पल में बच्ची की हत्या जिस आरोपी असलम के घर में हुई, उसका घर 2 जून से खुला पड़ा था। अब अचानक यह बात सुर्खियों में आने पर पुलिस जांच में जुटी है कि उसके घर का ताला टूट गया। अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि ताला कब किसने लगाया और कब किसने तोड़ा किसी को पता नहीं है। हां, इतना जरूर सामने आया है कि 9 जून की शाम तक असलम व जाहिद दोनों के घर खुले हुए थे। इसके बाद किसी ने ताले लगा दिए।बच्ची हत्याकांड के बाद पुलिस ने चार जून को मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की थी।
उस समय घरों में कोई ताला नहीं लगा था। घर का सामान जैसा कि तैसा पड़ा हुआ था। पुलिस के खुलासे के बाद स्थानीय लोग आरोपियों के घर पहुंचे थे। यहां हत्या की आशंका पर सभी अपनी अपनी कहानी बना रहे थे। इसके बाद पुलिस इनके घरों में पहुंची तो देखा कि पूरे घर में तरह-तरह के निशान थे। जानकारी पर बताया गया कि कई लोग घर के अंदर के हालात देखकर गए हैं। ऐसे में क्राइम सीन बिगड़ने के कारण पुलिस ने इन घरों को सील करना उचित नहीं समझा। इस कारण यह घर खुले ही रहे। फिर एकदम से इन घरों में एकाएक ताले भी लग गए। पुलिस जांच के अनुसार नौ जून को आरोपी असलम के घर का ताला टूटा हुआ था। दरवाजा भी खुला हुआ था। अब पुलिस इसकी जांच कर रही है कि खुले घरों पर ताले किसने लगाए। वहीं असलम के घर का ताला किसने खोला या तोड़ा है।
तीसरे दिन भी टप्पल कांड में सबूत देने नहीं पहुंचा कोई ः अलीगढ़। टप्पल कांड की मजिस्ट्रेटी जांच भले ही तीन दिन पहले शुरू हो गई हो, लेकिन इस मुद्दे पर तमाम हो हल्ला मचाने वालों में से कोई अब तक मजिस्ट्रेट के सामने लिखित अथवा मौखिक साक्ष्य देने नहीं पहुंचा है। जांच अधिकारी एवं एडीएम प्रशासन कृष्ण लाल तिवारी ने स्वीकार किया कि अब तक साक्ष्य देना तो दूर किसी ने फोन से भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। बताते चलें कि 11 जून से शुरू हुई मजिस्ट्रेटी जांच के लिए 19 जून तक साक्ष्य आमंत्रित किये गए हैं।