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विपक्ष का आरोप: पुलिस ने पीटा, फिर जेल में मार डाला गया फुरकान को

Sun, 05 Aug 2018 01:57 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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विपक्ष का आरोप: पुलिस ने पीटा, फिर जेल में मार डाला गया फुरकान को - फोटो : Rupesh
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 जिला कारागार के अस्पताल में बंदी के आत्महत्या मामले ने शनिवार को तूल पकड़ लिया। सपा, बसपा, कांग्रेस एवं रालोद के नेता सुबह से ही इस मामले में एकजुट हो गए हैं। वे मृतक के परिजनों संग एकत्रित होकर सिविल लाइंस थाने पहुंचे। यहां इंस्पेक्टर को जेल प्रशासन के खिलाफ हत्या की तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पूर्व विधायक व बसपा नेता जमीरउल्लाह की इंस्पेक्टर से तीखी नोकझोंक हुई। इससे हंगामे की स्थिति बन गई। बाद में यह लोग एकत्रित होकर जिलाधिकारी से मिले, जहां मेयर मो. फुरकान ने इसे पहले थाने में पीटना और फिर जेल में हत्या किया जाना करार दिया। 
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इस मामले में डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट को जांच सौंपी गई है। वहीं जेल अस्पताल की निगरानी ड्यूटी में लगे सिपाही के निलंबन की संस्तुति की गई है। इधर, देर शाम मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में मौत का कारण हैंगिंग यानि फांसी लगाकर आत्महत्या करना आया है।

जोहराबाग निवासी टिर्री चालक मो. फुरकान पुत्र इस्लाम खां को क्वार्सी पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बसपा नेता एवं पूर्व विधायक जमीरउल्लाह का आरोप था कि घटना वाले दिन टिर्री चालक से फुरकान से एक दुर्घटना हो गई थी। पुलिस ने पहले तो उसे बुरी तरह पीटा और घटना के 48 घंटे बाद उसका एनडीपीएस एक्ट में चालान कर दिया। उसके बाद जेल के अस्पताल में उसे साजिशन मार दिया गया और इसे आत्महत्या का रूप दिए जाने की कोशिश हो रही है।
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यूपी की जेलों में कई हत्याओं का होना इस बात का सबूत है कि यहां शासन प्रशासन नाम की चीज नहीं है और बेगुनाहों को निशाना बनाया जा रहा है। इस दौरान इंस्पेक्टर सिविल लाइंस विनोद कुमार ने जब जांच की बात कही तो पूर्व विधायक व इंस्पेक्टर में नोकझोंक हुई। बाद में इंस्पेक्टर ने कह दिया कि आप तहरीर दे दें। जांच के आधार पर कार्रवाई होगी। किसी को कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। 

इसके बाद सभी लोग एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट पहुंच जिलाधिकारी से मिले। जहां कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह ने कहा कि जेल अस्पताल में इस तरह की घटना होना इस बात का सबूत है कि सरकार और पुलिस किस तरह निर्दोषों का दमन करने में जुटी है। यह गठबंधन मात्र न्याय के लिए है। इस संवेदनशील प्रकरण की न्यायिक जांच होनी चाहिए।

सपा नेता अज्जू इशहाक ने कहा कि प्रदेश में गुंडे सरकार चला रहे हैं। मृतक का पोस्टमार्टम कराकर पैनल गठित कर मजिस्ट्रेटी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फांसी नहीं हत्या है। क्वार्सी पुलिस बेवजह निर्दोषों को एनडीपीएस में निरुद्ध कर रही है। विशेषकर दरोगा राजीव ने तो एनडीपीएस एक्ट में निर्दोषों को जेल भेजने का बीड़ा उठा रखा है। वहीं मेयर मो. फुरकान ने मजिस्ट्रेटी जांच की मांग रखी। इस पर डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट को मजिस्ट्रेटी जांच का जिम्मा सौंपा है।

वहीं डीएम के निर्देश पर मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया है। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद पुलिस सुरक्षा में शव घर भेज दिया गया। पोस्टमार्टम में फांसी लगाना व एक पुरानी चोट का उल्लेख आया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस विनोद कुमार के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट के परीक्षण के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। इधर रालोद नेता जियाउर्रहमान ने जेल में हुई फुरकान की मौत पर आक्रोश व्यक्त किया है । उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए इसे सरकार की विफलता बताया है। पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं । इस मौके पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। 

लापरवाही पर सिपाही के निलंबन की संस्तुति
इस प्रकरण में वरिष्ठ अधीक्षक कारागार आलोक सिंह ने बताया कि फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। मौत की मजिस्ट्रेटी जांच के साथ-साथ न्यायिक जांच की सिफारिश भी कर दी गई है। वहां से जांच के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। फिलहाल जेल अस्पताल की निगरानी ड्यूटी में लगे सिपाही महेंद्रपाल यादव के निलंबन की संस्तुति कर दी गई है। 
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