दिल्ली जा रही मऊ-आनंद बिहार एक्सप्रेस में बुधवार तड़के तकरीबन आधा दर्जन बदमाशों ने स्लीपर कोच एस-5 में जमकर लूटपाट की। विरोध करने पर उन्होंने यात्रियों के साथ मारपीट की, जिसमें एक मुसाफिर के हाथ में चोट आई। आराम से लूटपाट को अंजाम देने के बाद बदमाश रास्ते में ही ट्रेन से कूद कर फ रार हो गए। पीड़ितों ने स्थानीय रेलवे स्टेशन पर जीआरपी में मुकदमा दर्ज कराया है। एसएसआई जीआरपी अब्दुल कादिर ने कहा कि मामला कानपुर सेंट्रल स्टेशन से जुड़ा होने के कारण वहां जीआरपी को भेज दिया जाएगा। आगे की विवेचना अब वहीं से होगी।
मऊ रेलवे स्टेशन से मंगलवार रात मऊ-आनंद बिहार एक्सप्रेस दिल्ली के लिए रवाना हुई। रात होने के कारण अधिकांश यात्री कोच में सो रहे थे। लखनऊ से गाड़ी आगे बढ़ी तभी बुधवार सुबह करीब साढे़ तीन बजे आधा दर्जन बदमाश स्लीपर कोच एस-5 में सवार हो गए। बदमाशों ने सबसे पहले किरन यादव पत्नी विनोद यादव निवासी आजमगढ़ की सीट नंबर 44 पर पहुंचे, जहां बदमाशों ने उनसे हथियारों के बल पर 6 हजार रुपये, मोबाइल फ ोन, सोने की अंगूठी आदि छीन ली।
इसके बाद सरिता निवासी तेंडली सराय लखनऊ के पास सीट नंबर 32 पर पहुंचे, जिनसे उन्होंने एक हजार रुपये और सोने की चेन लूटी। इसके बाद बदमाश विक्कू पत्नी विजेंद्र सिंह निवासी गौतमबुद्ध नगर के पास सीट नंबर 28 पहुंचे। यहां विरोध करने पर बदमाशों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ में चोट आ गई।
बदमाशों ने विक्कू से 5 हजार रुपये, मंगलसूत्र, सोने की चेन और अंगूठी छीन ली। इसके साथ ही सैयदा खातून पत्नी असगरी निवासी ब्रह्मपुरी दिल्ली से दो सेलफ ोन, दो कैमरा, 20 हजार रुपये, सोने की चेन और अंगूठी भी लूट ली। कई और यात्रियों से बदमाशों ने लूटपाट की। घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश कानपुर स्थित गंगा पुल पर कूदकर फ रार हो गए। इस घटना के पीड़ितों ने कोच कंडेक्टर के माध्यम से पुलिस को सूचना दी। ट्रेन के स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही पीड़ितों ने इस घटना के संबंध में मुकदमा दर्ज कराया।
सवाल...300 किमी तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं..?
अलीगढ़। मऊ आनंद बिहार एक्सप्रेस में कानपुर के गंगा पुल से पहले ही स्लीपर कोच में लूटपाट की घटना हो चुकी थी। पुलिस सक्रिय रहती तो कानपुर पहुंचते ही मुकदमा दर्ज कर तुरंत उसकी विवेचना शुरू कर दी जाती, लेकिन कानपुर से 300 किमी लंबा और छह घंटे का सफर करने के बाद जब ट्रेन अलीगढ़ आई तो मुकदमा दर्ज कराया गया। 6-7 घंटे में बदमाश आराम से अपने गंतव्य तक पहुंच गए होंगे। ट्रेनों में होने वाली अधिकांश घटनाओं में मौके पर ही कार्रवाई न होने पर अपराधियों की धरपकड़ में काफी दिन लग जाते हैं।