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दुष्कर्मियों को 24 घंटे में फांसी दें या पेट्रोल डालकर जिंदा जला दें: प्राची

Mon, 10 Jun 2019 01:54 AM IST
राजेश सिंह क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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साध्वी प्राची साथ में अमित गोस्वामी और भरत गोस्वामी। - फोटो : Amar Ujala
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 अक्सर विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली साध्वी प्राची रविवार को यहां फिर मीडिया को विवादित बयान दे गई हैं। टप्पल में बच्ची के परिवार से मिलने आ रही साध्वी को यमुना एक्सप्रेस-वे के जेवर इंटरचेंज पर जब रोका गया तो उन्होंने मीडिया से कहा कि जहां एक विशेष समुदाय के लोग रहते हैं, वहीं बच्चियों व महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं और अपराध का ग्राफ अधिक है। टप्पल के दुष्कर्मियों को चौबीस घंटे में फांसी की सजा दी जाए नहीं तो पेट्रोल छिड़ककर सरेआम जला दिया जाए। अपराधियों की भांति दुष्कर्मियों का भी चौबीस घंटे में एनकाउंटर कर इनमें दहशत पैदा की जाए। देश की जनता में उबाल है। पीड़ित को मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए।
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दोपहर करीब डेढ़ घंटे तक जेवर टोल प्लाजा पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें कानून व्यवस्था का हवाला देकर टप्पल जाने से रोके रखा। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कहा कि अब विशेष समुदाय के क्षेत्र में इस बात की जांच कराई जाए कि कौन लोग दुष्कर्म की घटना में जेल गए थे। उन्हें पुन: जेल भेजा जाए। आज मेरा उन लोगों से अनुरोध है जो ऐसी घटनाओं के बाद शिव चौक, महावीर चौक सहित इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन करते हैं, इससे कुछ नहीं होने वाला है।


न्यायालय को भी शीघ्र न्याय करना चाहिए। टप्पल की घटना अत्यंत कष्टकारक है। वहीं बरेली, हमीरपुर, बाराबंकी सहित अन्य स्थानों पर भी ऐसी घटनाओं का होना इस बात की पुष्टि करता है कि त्वरित वाद निस्तारित कराकर सजा दिलाने की कहने से कुछ नहीं होने वाला है। ऐसे अपराधियों को 24 घंटे में फांसी की सजा दी जाए नहीं तो पेट्रोल छिड़क कर जल दिया जाए, जिससे इनके अंदर भय कायम हो सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री ने हेलमेट नहीं लगाने पर एक हजार रुपये के जुर्माना लागू किया है।
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उसी प्रकार दुष्कर्मियों के विरुद्ध भी शीघ्र कोई कानून बनाने की पहल करनी चाहिए। जैसे दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर किया जाता है ऐसे ही दुष्कर्मी का भी चौबीस घंटे में एनकाउंटर कर न्याय दिलाया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि अब देशवासियों को 15 लाख और 72 हजार नहीं चाहिए बल्कि ऐसी घृणित घटनाओं पर एक कठोर कानून चाहिए। इसके बाद बच्ची के परिवार से फोन पर बात कर वह वहीं से दिल्ली लौट गईं।
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