जिला एवं सत्र न्यायाधीश यूसी श्रीवास्तव के न्यायालय से हत्या के पांच अलग-अलग प्रकरणों में आठ लोगों की जमानत निरस्त की गई हैं। इनमें महानगर के नगला मल्लाह के युवक रामअवतार की हत्या का प्रकरण भी शामिल है। उसके भी एक आरोपी की जमानत रद्द की गई है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी डॉ.अबसारुल हसन किदवई के अनुसार नगला मल्लाह निवासी रामअवतार की क्वार्सी बाईपास इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में गिरफ्तार शमीम की ओर से जमानत याचिका दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया।
इधर, खैर के गांव पला चांद से 3 नवंबर 2015 को बारात बुढ़ांसी हरदुआगंज में आई थी। जहां दो पक्षों में झगड़े के दौरान कई लोग जख्मी हुए, जबकि शाकिर की हत्या कर शव नहर में फेंक दिया गया था। दो दिन बाद उसका शव मिला था। मामले में बुढ़ांसी के अबरार, शमशा व लाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। तीनों की ओर से जमानत याचिका दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया है।
इधर, विजयगढ़ के गांव नगला तुलाराम में शिक्षक शशिपाल ने गांव के कुछ लोगों के दबाव में आकर जहर खाकर जान दे दी। मामले में नेत्रपाल आदि पर मुकदमा दर्ज हुआ। नेत्रपाल की ओर से जमानत दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया है। दादों के गांव जयशिया नगला में 19 नवंबर को छेड़खानी के विरोध में वृद्धा प्रेमादेवी की हत्या कर दी गई। मामले में महाराज सिंह, परसादी लाल आदि को नामजद किया गया। दोनों की ओर से जमानत याचिका दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया।
अकराबाद के गांव नगला पतेल में 26 मई 2015 को दहेज के लिए विवाहिता सुरेखा की हत्या कर दी गई। इस मामले में पति वीरेश आदि को नामजद किया गया। जो जेल में है। वीरेश की ओर से दायर जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया गया।