राष्ट्रीय स्तर का फुटबाल खिलाड़ी एवं एएमयू के पूर्व छात्र मेहताब तथा वाकिफ हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर छात्रों ने कैंपस में मार्च निकाला और जिला प्रशासन के माध्यम से अपनी मांगों को राष्ट्रपति के पास भेजा। इस दौरान छात्रों ने इंतजामिया की भूमिका पर सवाल उठाया और कहा कि एएमयू प्रशासन सतर्क रहता तो आईएनए अधिकारी तंजील की हत्या नहीं होती।
गुरुवार को छात्र मौलाना आजाद लाइब्रेरी कैंटीन से बाब-ए-सैयद तक कैंडल मार्च निकाला। बाब-ए-सैयद पर छात्रों को संबोधित करते हुए छात्र नेता शाहशांह ने कहा कि फरवरी में उन्हें मुनीर ने धमकी दिया था। उस समय भी एएमयू प्रशासन एवं जिला प्रशासन को सूचना दिया था। प्रशासन सतर्क रहता तो अपराधी तंजील हत्याकांड को अंजाम नहीं देते।
उन्होंने कहा कि पिछले छह महीने में अपराधियों की गोली से कई छात्र घायल हुए। आलमगीर का मर्डर हुआ, बावजूद इसके प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। एएमयू प्रशासन गंभीर होता तो राष्ट्रीय स्तर के फुटबाल खिलाड़ी मेहताब एवं वाकिफ की हत्या नहीं होती। एएमयू प्रॉक्टर आफिस के सामने डबल मर्डर साजिश से किया गया है। इसमें शिक्षक भी जिम्मेदार है।
अभी तक नामजद अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। छात्रों का कहना था कि सीबीआई जांच से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है। वीसी छात्रों को अपनी औलाद कहते है। क्या औलाद की हत्या के बाद अभिभावक ऐसे चुप बैठते है। इस अवसर पर जानिब हसन, हैदर, वाजिद रसीद खान, तुफैल, कुंवर अहमद, आफाक, अकरम शेर एवं शाहिद आदि मौजूद थे। छात्रों के मार्च को देखते हुए कैंपस में प्रॉक्टोरियल टीम के साथ-साथ पुलिस प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है।