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एजेंसियां बूझें एक सवाल..किस देश का वासी है इकबाल1

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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देश की जिन एजेंसियों को 2005 मैच देखने हिंदुस्तान आए 56 लापता पाकिस्तानी नागरिकों की खोज का जिम्मा दिया गया है, उन्हीं एजेंसियों के लिए अलीगढ़ से एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।

यह सवाल उस पाकिस्तानी नागरिक की ओर से है, जो फर्जी पते के आधार पर खुद को हिंदुस्तानी बताकर मादक पदार्थों की तस्करी करता फिर रहा था और आज इसी जुर्म में जेल में है।
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चूंकि एलआईयू रिपोर्ट के चलते उसका पाकिस्तानी पता अंकित है। इसीलिए जमानत के बाद उसकी रिहाई टल गई। मगर खुद इकबाल हर स्तर पर एलआईयू की दलील को खारिज कर रहा है।

पिछले दिनों दिल्ली में पाक एंबेसी की लीगल काउंसलिंग में भी उसने यही दोहराया कि वह कभी पाक नहीं गया। उसका परिवार अलीगढ़ के सासनी गेट इलाके में ही रहता है। हालांकि इस दलील को झूठ माना जा रहा है। फिर भी इकबाल के पैरोकार जेल से लेकर अदालत तक हर पटल पर यह दलील देते फिर रहे हैं।

पुलिस रिकार्ड और एलआईयू रिपोर्ट
वर्तमान में करीब 74 वर्षीय इकबाल पुत्र गफ्फार निवासी गांधी रोड कराची (पाकिस्तान) को कई साल पहले उत्तराखंड के मुक्तेश्वर में पुलिस ने पकड़ा था। उसने अपना पता बीबी की सराय सासनी गेट बताया था। इससे पहले 2007 व 2010 में भी वह अलीगढ़ कोतवाली से तस्करी में जेल गया था। अलीगढ़ जेल से उसे मुक्तेश्वर न्यायालय ने तलब किया और वहां उसे 10 साल की सजा सुनाई। इसी तरह 2010 के अलीगढ़ के मुकदमे में भी उसे 5 साल की सजा हुई।

चूंकि 2007 का अलीगढ़ का मुकदमा अदालत में लंबित था तो यहां की अदालत की तलबी पर उसे मुक्तेश्वर से 2017 में यहां शिफ्ट कर दिया गया। इधर, अदालती प्रक्रिया में 2016 में पुलिस से उसके पते का सत्यापन कराया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भेद खोला कि वह मूल रूप से पाकिस्तान का है।

इस पर पुलिस के कान खड़े हुए और एसएसपी के निर्देश पर सीओ एलआईयू ने जांच की। जांच में उसके पाकिस्तानी होने की तस्दीक हो गई और इस संबंध में पत्र कारागार प्रशासन को भेजा गया। साथ ही दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास को भी सूचना भेज दी गई।

दूतावास ने इसकी जांच कराई, जांच में इकबाल का पता सही होने का सच सामने आया। बताया गया कि वह बचपन में करीब 5-6 वर्ष की उम्र में मां के साथ भारत आ गया। यहां मां की मृत्यु के बाद रोजी-रोटी के लिए तस्करी करने लगा और पकड़े जाने पर उल्टे-सीधे पते बताकर बचता रहा।

इकबाल की दलील
एलआईयू रिपोर्ट के बाद इकबाल को पाकिस्तानी एंबेसी ने लीगल काउंसलिंग के लिए दिल्ली तलब किया। वहां उसने बताया कि वह कभी पाकिस्तान नहीं गया। वहां उसकी ननिहाल जरूर है। उसके वालिद की मौत के बाद उसकी मां उसे वहां ले जाने के लिए तैयारी कर रही थीं। पासपोर्ट आदि बनवाया जा रहा था। तभी उसकी मां की मौत हो गई और वह अकेला यहीं का होकर रह गया। उसने यहां दो शादियां कीं, जिनसे 12 बच्चे हैं। पहली पत्नी की मौत हो चुकी है। परिवार आज भी शहर में ही रहता है। यही दलील अब जमानत के बाद रिहाई अटकने पर वह जेल व अदालत स्तर पर पैरोकारों से दिलवा रहा है।
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एलआईयू रिपोर्ट के आधार पर जेल के दस्तावेजों में इकबाल का पता पाकिस्तान का दर्ज है। उसकी जमानत के बाद रिहाई भी इसी वजह से वापस हुई है। यह सही है कि वह खुद के भारतीय होने की दलील देता है। मगर इसके कोई साक्ष्य नहीं हैं और यह एजेंसियों के स्तर से जांच का विषय है।
- आलोक कुमार वरिष्ठ अधीक्षक कारागार
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