क्राइम न्यूज, अमर उजाला अलीगढ़।
आशीष निगम।
सहारनपुर में जहरीली शराब पीने से हुई 114 मौतों के बाद जिले में जहरीली शराब के खिलाफ अभियान जारी है। जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा ने बताया कि कच्ची शराब गेहूं, जौ, महुआ, मेवा, सेब, अंगूर, चीनी, गन्ने के रस, गुड़ और आलू से भी बनती है। इनके रस को फरमेंटेड कर कच्ची शराब बनाई जाती है। अक्सर इस शराब को और नशीला करने के लिए इसमें मेंडेक्स की गोली, नौसादर और यूरिया की मिलावट की जाती है।
कई बार मेंडेक्स, नौसादर और यूरिया की मात्रा अधिक होने से शराब जहरीली हो जाती है, जिससे एक साथ कई मौतें हो जाती है। इसके अलावा अक्सर शराब के नाम पर केमिकल के प्रयोग से एक साथ कई मौतें हो जाती है। खासतौर पर मिथायल अल्कोहल के इस्तेमाल से।
धीरज शर्मा ने बताया कि सहारनपुर कांड में पकड़े गए मुख्य आरोपी अर्जुन ने कबूल किया है कि उसने रुड़की स्थित एसी सेलूलॉज कंपनी से छह ड्रम केमिकल खरीदा था। जिसको शराब बनाने में इस्तेमाल किया गया।
यही केमिकल वहां हुई मौतों की मुख्य वजह है। जिसको अब वहां की पुलिस ने जांच के लिए लैब भेजा है। उन्होंने बताया कि गुजरात के कच्छ में संचालित सभी बड़ी रिफाइनरी में मिथायल अल्कोहल बनता है। जिसका इस्तेमाल साल्वेंट के रूप में होता है। ये पेंट बनाने में भी प्रयोग होता है। टैंकरों से इसको पूरे देश में पहुंचाया जाता है। इसकी सुगंध और सभी लक्षण स्प्रिट की तरह होते है, ये पूर्णता पारदर्शी होता। इसकी कीमत 8 से 12 रुपये प्रति लीटर होती है। केंद्र सरकार की ओर से जारी सूची में ये जहरीले रसायनिक पदार्थों में शामिल है।
इसी तरह से एक दूसरा रसायन है इथायल अल्कोहल। ये भी स्प्रिट की तरह होता है और पेट्रोल में मिलाया जाता है। ये भी टैंकरों से गुजरात की रिफाइनरी से पूरे देश में भेजा जाता है। इथायल अल्कोहल का इस्तेमाल अक्सर शराब के रूप में भी होता है। इसकी वजह टैंकर ड्राइवर हैं जो लंबे सफर में पैसों के लालच में परिचित ढाबों में इसको बेच देते हैं। ढाबे वाले भी इसको गांव-गांव पहुंचा देते हैं, लेकिन वह इथायल और मिथायल अल्कोहल में फर्क नहीं कर पाते, क्योंकि दोनों देखने में एक सामान हैं।
इथायल अल्कोहल पीने से किसी की जान नहीं जाती है, लेकिन अगर इथायल अल्कोहल के धोखे में कोई भी मिथायल अल्कोहल पी जाए तो उसकी मौत निश्चित है, क्योंकि ये शरीर में पहुंचते ही नर्वस सिस्टम को फेल कर देता है। आदमी अंधा हो जाता है और उसकी मौत हो जाती है। जब कभी बड़ी मात्रा में मिथायल अल्कोहल को शराब के धोखे में पिया जाता है तो बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है।
अलीगढ़ से भी इन दोनों केमिकल के ट्रक गुजरते हैं और ढाबों में ठहरते हैं। इसलिए यहां सतर्कता बढ़ाई गई है। इसकी धरपकड़ को लेकर ढाबा और होटलों में छापेमारी की जा रही है। कच्ची शराब बनाने वालों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है।
शराब की धरपकड़ में 18 केस दर्ज
अलीगढ़। जिला आबकारी टीम ने अभी तक शराब के अवैध कारोबार से संबंधित 18 केस दर्ज किए हैं। इसमें 232 पेटी शराब भी बरामद हुई, जो अलग-अलग प्रांतों के लिए आवंटित हुई थी। वहीं 100 लीटर कच्ची शराब मिली है। इसी तरह से 600 लीटर कच्ची शराब को बनाने वाला लहन मिला है।
जिसको टीम ने नष्ट करा दिया था। सोमवार को आबकारी की टीम ने 700 लीटर, मंगलवार को 30 लीटर बुधवार को 19 लीटर शराब पकड़ी गई।