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शहर से सटी बेशकीमती जमीन ‘भूमाफिया’ को आवंटित

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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भूमाफिया तहसीलों में किस कदर हावी हैं, इसकी बानगी तहसील कोल में एक बेशकीमती जमीन का फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर देखने को मिली है। यहां ओजोन सिटी से सटी गांव याकूतपुर की बेशकीमती सरकारी 8 बीघा जमीन का षड्यंत्र के तहत फर्जी तरीके से पट्टा बिना किसी अधिकार के दो महिलाओं के नाम कर दिया गया और जमीन सरकारी अभिलेखों में उनके नाम दर्ज कर दी गई।

जब शिकायत हुई और जांच हुई तो भेद खुला कि याकूतपुर की न रहने वाली इन दोनों महिलाओं को ऊसर भूमि का पट्टा नियम विरुद्ध कर दिया गया है, जबकि यह नियमानुसार यह सरकारी भूमि कभी संक्रमणीय दर्ज नहीं हो सकती। इस खुलासे पर एसडीएम के निर्देश पर बन्नादेवी में दोनों महिला लाभार्थियों व उन्हें लाभ पहुंचाने के आरोपी अधिकारी, कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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तहसील कोल में धनीपुर क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक रामवीर शर्मा की तहरीर पर दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा गया है कि गांव याकूतपुर के अभिलेखों के अनुसार खरसा संख्या 273 पर आठ बीघा दो विस्वा जमीन ऊसर दर्ज है। इसमें 0.6300 हेक्टेयर भूमि पर राजवती पत्नी रामजीलाल, सुमन पत्नी गोपाल, निवासीगण याकूतपुर का नाम फर्जी रूप से अंकित कर दिया गया, जबकि इस मामले में आवंटन से संबंधित कोई पत्रावली तहसील कोल के कार्यालय अभिलेखागार में उपलब्ध नहीं है।

हालांकि इस खसरा नंबर पर फर्जी प्रविष्ट को तत्कालीन एसडीएम ने 28 जून 2013 में निरस्त कर भूमि को ग्राम सभा में ऊसर दर्ज कराया गया था। अब 10 मई 2018 को ग्राम समाज की इस संपत्ति को हड़पने के मकसद से लाभार्थियों से दुरभिसंधि कर तत्कालीन रीडर व पीठासीन अधिकारी द्वारा ग्राम सभा का पक्ष सुने बिना राजवती व सुमन को अनुचित लाभ देकर अभिलेखों में फर्जी तरीके व षड्यंत्र से बिना किसी अधिकार के संक्रमणीय भूमिधर अंकित कर दिया गया है।

जो आईपीसी की दफा 409, 419, 420, 467, 468, 120 बी, व लोक संपत्ति हानि निवारण अधिनियम की धारा 3/5 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए राजवती, सुमन व अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जाए। एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव ने तहरीर के आधार पर यह मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।

गांव याकूतपुर की सरकारी ऊसर के रूप में दर्ज जमीन को लेकर शिकायत मिली थी कि इसमें फर्जी प्रविष्टियां कर दो महिलाओं को आवंटित कर दिया गया है। इसकी जांच में पाया गया कि न तो दोनों महिलाएं इस गांव की मूल निवासी हैं और न यह जमीन किसी को आवंटित की जा सकी है। न इसे संक्रमणीय दर्ज किया जा सकता है। इस मामले में दोनों महिलाओं के खिलाफ राजस्व निरीक्षक की तहरीर पर बन्नादेवी में मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह लाभ अनुचित तरीके से दिया गया है, इसलिए सवाल खड़े कर रहा है। लेखपाल व तहसीलदार की स्पष्ट रिपोर्ट है। अब प्रकरण जिलाधिकारी के समक्ष भेज दिया गया है। जांच में लाभ देने के जो भी आरोपी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। फिलहाल तहसीलदार को जमीन वापस कब्जे में लेकर ग्राम सभा में दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। -जोगिंदर सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम कोल
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निवर्तमान अफसर के दामन पर छींटे, पर अभी सब मौन
इस फर्जीवाड़े में जिस पीठासीन अधिकारी व रीडर पर दोनों महिलाओं को साजिश के तहत अनुचित लाभ देने का आरोप लग रहा है, कल तक वह अधिकारी जिले में बेहद सुर्खियों में थे। हालांकि पिछले दिनों तबादले के बाद वह गैरजनपद चले गए और रीडर दूसरी जगह तैनात कर दिए गए। मगर पीठासीन अधिकारी या रीडर पर अभी सीधे-सीधे किसी ने आरोप नहीं लगाए हैं। हां, लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक ने अपनी रिपोर्ट में इतना ही कहा है कि यह जमीन गलत तरीके से आवंटित की गई है। कानूनन पीठासीन अफसर पर अगर आरोप लगता है तो कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति लेनी होगी। शायद यही वजह है कि अधिकारी अभी आगे की जांच में लाभ देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होने की बात कह रहे हैं।
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