न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ से उमरा करने सऊदी अरब गया एक इंजीनियर वापसी की फ्लाइट छूट जाने के बाद हुए विवाद को लेकर वहां फंस गया है। दुबई में रह रहे अलीगढ़ के रूपेश पाठक को जब उनके पोर्टल के जरिये इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने सऊदी में भारतीय दूतावास को पूरे प्रकरण से अवगत कराया। इसके बाद जेद्दाह स्थित भारतीय दूतावास से इंजीनियर के परिजन और मित्रों के फोन नंबर मांगे गए हैं, ताकि उसकी वापसी की प्रक्रिया शुरू की जा सके। अब इस इंजीनियर के जल्द ही भारत वापस आने की उम्मीद की जा रही है।
रूपेश पाठक पहले भी खाड़ी देशों में फंसे कई भारतीयों की मदद कर चुके हैं। इसके लिए उन्होंने ‘इंडियन हेल्प डेस्क’ नामक पोर्टल भी लांच किया था। सिविल लाइन इलाके के जोहरा बाग निवासी शमसिया खातून ने श्याम नगर जाकर इस पोर्टल के चेयरमैन व रूपेश के पिता शिवेंद्र पाठक को सौंपे गए पत्र में कहा है कि उनका बेटा मंसूर अख्तर जकरिया मार्केट स्थित एक ट्रेवल एजेंसी के माध्यम से गत 22 मई को उमरा करने सऊदी अरब गया था।
निर्धारित 28 दिन की अवधि गुजर जाने के बाद जब बेटा वापस नहीं आया तो ट्रेवल एजेंसी से संपर्क किया। वहां बताया गया कि मंसूर अख्तर की वापसी की फ्लाइट छूट गई है। आप टिकट के पैसे दे दो तो वह एक-दो दिन में आ जाएगा। इसके बाद एजेंट को 25 हजार रुपये और दिए। इसके बाद भी जब मंसूर नहीं आया तो बताया गया कि उसका वहां पर इमीग्रेशन विभाग वालों के साथ कुछ झगड़ा हो गया है। इससे मामला तकनीकी पेच में फंस गया है। इसके बाद 28 जून को मंसूर अख्तर के परिजन अलीगढ़ में इंडियन हेल्प डेस्क के कार्यालय पहुंचे। यहां से दुबई में रह रहे रूपेश पाठक को पूरा मामला बताया गया।
रूपेश ने सऊदी अरब में भारतीय दूतावास से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी ट्वीट के माध्यम से दी। इसके बाद दूतावास सक्रिय हुआ है। उसने मंसूर अख्तर के परिजनों और संपर्क में रहने वालों के फोन नंबर मांगे हैं। साथ ही यह भी बताया है कि इस प्रकरण में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वाद विवाद होने पर मारपीट का मुकदमा
एएमयू में डिप्लोमा इंजीनियरिंग के छात्र रहे मंसूर अख्तर इस समय पाकिस्तान के एक व्यक्ति के साथ वहां रह रहे हैं। मंसूर ने रूपेश पाठक को बताया कि उसका इमीग्रेशन अधिकारियों के साथ केवल वाद विवाद हुआ था। लेकिन उसके खिलाफ जो मुकदमा लिखा गया है उसमें मारपीट करना भी शामिल किया गया है। उसे चार दिनों तक हवालात में रखा गया। वहां उसके सिर पर काला कपड़ा डालकर हाथों को पीछे बांध कर रखा गया। यह बेहद कष्टकारक था।