न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के इतिहास विभाग के आर्किलोजी सेक्शन में करीब तीन साल पहले चोरी की घटना हुई थी। इससे संबंधित एफआईआर थाना सिविल लाइन में दर्ज हुई थी। हालांकि अब भी रहस्य बना हुआ है कि एफआईआर में पुरावशेषों के चोरी का जिक्र था या नहीं।
एएमयू से ऐतिहासिक महत्व के पत्थर गायब होने तथा मूसा डाकरी म्यूजियम के कोआर्डिनेटर को बदलने की खबर आने के बाद कैंपस में तरह-तरह की चर्चा हो रही हैं। विभाग का चेयरमैन बनने के बाद प्रो. अली नदीम रिजावी ने ऐतिहासिक महत्व के पुरावशेषों की सूची बनाने एवं खुदाई में प्राप्त पुरावशेषों का मिलान करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी अभी जांच कर रही है।
इस संबंध में एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. साफे किदवई ने कहा कि मूसा डाकरी म्यूजियम के पूर्व कोआर्डिनेटर पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। बल्कि कुलपति ने इतिहास विभाग तथा म्यूजियोलोजी विभाग के अध्यक्षों को मूसा डाकरी म्यूजियम का क्रमश: पदेन कोआर्डिनेटर तथा डिप्टी कोआर्र्डिनेटर नियुक्त किया है। इनका कार्यकाल दो वर्ष अथवा आगामी आदेशों तक होगा।
कुलपति ने मूसा डाकरी म्यूजियम की एक मैनेजमेंट कमेटी भी गठित की है, जिसके अध्यक्ष म्यूजियम के पदेन कोआर्डिनेटर होंगे, जबकि अन्य सदस्यों में पदेन डिप्टी कोआर्डिनेटर, इतिहास विभाग के आर्केलोजी सेक्शन के टीचर इंचार्ज तथा कुलपति द्वारा नामित म्यूजियोलोजी विभाग के प्रोफेसर सैयद आसिफ अख्तर और इतिहास विभाग के प्रोफेसर अली अथहर शामिल हैं।