जनपद की अदालतें वादों से ओवरलोड हो रही हैं। एक कोर्ट में 500 वाद से अधिक लंबित नहीं होने चाहिए, लेकिन अलीगढ़ की प्रत्येक कोर्ट में 2500 वाद लंबित हैं। 1.02 लाख वाद विचाराधीन हैं।
कोर्ट की संख्या मात्रा 40 है। जिला जज उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने जनपद में कोर्ट में बढ़ते वादों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि क्योंकि जनता कानून का पालन कर वाद घटाने में सहयोग नहीं कर रही है। न्यायाधीश भी धारा 89, सीपीसी (इसके द्वारा विवादों का निपटारा न्यायालयों के बाहर किया जाता है) का प्रयोग नहीं करते हैं।
जिला जज रविवार को अलीगढ़ महोत्सव 2016 - राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी के मुक्ताकाश मंच पर विषय पर आयोजित रूल ऑफ लॉ सोसायटी की विधि संगोष्ठी ‘विवादों का निपटारा न्यायालय के बाहर’ में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। जिला जज ने सलाह दी कि जनता स्वयं कानून का पालन करे ताकि मुकदमा न बढे़ं। धारा 89, सीपीसी का पालन करने से समाज में शांति स्थापित होगी। इसके लिए प्रत्येक अधिवक्ता से सहयोग अपेक्षित है।
अध्यक्षता विष्णु कुमार विमल वरिष्ठ अधिवक्ता ने की। मुख्य वक्ता दुर्गेश चंद्र गौतम पूर्व अध्यक्ष दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन. विशिष्ट अतिथि रियासत हुसैन पूर्व जिला जज व अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत, डा. सीबी सिंह चेयरमैन बाल विकास समिति अलीगढ़, अनिल सारस्वत मुख्य निदेशक विवेकानंद कॉलेज ऑफ लॉ, ठा. रामप्रताप सिंह पूर्व अध्यक्ष दि अलीगढ़ बार एसो. चौ. जगवीर सिंह व मानवाधिकार कार्यकर्ता रामऔतार सिंह एड. महासचिव दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन, श्याम सारस्वत मुख्य संयोजक व रूल ऑफ लॉ सोसा के जिला महासचिव जीसी सिन्हा आदि ने कानून की जानकारी दी। वाद कम हों इस पर सुझाव दिए।
कार्यक्रम का संचालन ऊरूस फ ातिमा अध्यक्ष शिक्षा विभाग विवेकानंद कॉलेज ने किया। सेमिनार में आरडी डांस ग्रुप के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किये।