अलीगढ़ में अतरौली के गांव चंडौला सुजानपुर में आठ वर्ष पूर्व विवाहिता की हत्या के मुकदमे में अदालत ने दोषी पति, जेठ-जेठानी को उम्रकैद की सजा से दंडित किया है। यह फैसला एडीजे-16 राजीव शुक्ला की अदालत से सुनाया गया है। खास बात है कि इस मामले में मायका पक्ष गवाही से मुकर गया था। मगर न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला सुनाया है।
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार घटना 17 व 18 जनवरी 2015 की रात की है। वादी मुकदमा गांव खेड़ा निवासी भोलांबर ने मुकदमा दर्ज कराया कि उसने अपनी बेटी गायत्री की शादी पांच वर्ष पहले चंडौला सुजानपुर के सुरेंद्र सिंह संग की थी। शादी के बाद से उसे दहेज में बाइक की खातिर पति के अलावा जेठ इंद्रपाल व जेठानी माया देवी तंग करने लगे। कई बार इस संबंध में समझाया गया। मगर वे लोग नहीं माने।
घटना वाली रात खबर मिली कि उनकी बेटी की मौत हो गई है। कहा गया कि बाहर का कोई अज्ञात व्यक्ति घर के दरवाजे पर उसे मारकर भाग गया है। मामले में पिता ने तीनों को नामजद कर घर में हत्या कर शव बाहर फेंकने का आरोप लगाया। पुलिस स्तर से विवेचना के आधार पर दहेज हत्या में चार्जशीट दायर की गई।
न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान वादी मुकदमा सहित मायका पक्ष के तीन गवाह मुकर गए। मगर पुलिस विवेचना के साक्ष्य, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर व विवेचक आदि की गवाही के आधार पर तीनों को हत्या में दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। तीनों को उम्रकैद व 50-50 हजार रुपये से दंडित किया है।