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Aligarh News: आरोपी पिता-पुत्र की जमानत कोर्ट ने की खारिज, अस्पताल में घुसकर हुई थी मरीज की हत्या

Sun, 31 May 2026 12:08 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

वेदपाल गंभीर हालत में क्वार्सी के रेनुका अस्पताल में भर्ती थे। देर रात दो हमलावर अस्पताल में दाखिल हुए और बेड पर लेटे वेदपाल को ताबड़तोड़ गोलियां मार दीं। इस दुस्साहसिक हत्याकांड से पूरे स्वास्थ्य महकमे और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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अलीगढ़ में क्वार्सी थाना क्षेत्र के एक अस्पताल में घुसकर मरीज की सनसनीखेज हत्या करने के मामले में अदालत ने दो मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। एडीजे (एससी-एसटी एक्ट) राकेश वशिष्ठ की अदालत ने यह निर्णय लिया। जेल में बंद इन आरोपियों में से एक बागपत पुलिस में है और दूसरा आगरा परिक्षेत्रीय कार्यालय का कर्मचारी है। रसूख और खाकी से जुड़े होने के बावजूद कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत देने से साफ इन्कार कर दिया। 

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यह वारदात इसी साल 16 मार्च की रात अंजाम दी गई थी। खैर थाना क्षेत्र के गांव अहरौला निवासी वेदपाल गंभीर हालत में क्वार्सी के रेनुका अस्पताल में भर्ती थे। देर रात दो हमलावर अस्पताल में दाखिल हुए और बेड पर लेटे वेदपाल को ताबड़तोड़ गोलियां मार दीं। इस दुस्साहसिक हत्याकांड से पूरे स्वास्थ्य महकमे और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था।

जांच के बाद पुलिस ने मथुरा के गोविंद नगर निवासी देवेंद्र सिंह (पिता) और जितेंद्र सिंह (भाई) को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। घटना के पीछे मृतक वेदपाल की मथुरा की एक युवती से दोस्ती थी। युवती की जब दूसरी जगह शादी तय हुई, तो वेदपाल ने कथित तौर पर बीच में दखल देकर उसका रिश्ता तुड़वा दिया था। रिश्ता टूटने के बाद भी वेदपाल उस युवती को लगातार परेशान कर रहा था, जिससे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लग गई थी। बहन की प्रताड़ना और परिवार के अपमान का बदला लेने के लिए युवती के चचेरे भाई भूपेंद्र चौधरी ने पेशेवर शूटरों के साथ मिलकर अस्पताल के भीतर इस हत्याकांड को अंजाम दिया।
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इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू आरोपियों का पुलिस विभाग से जुड़ा होना है। आरोपी पिता देवेंद्र सिंह जहां बागपत पुलिस में तैनात हैं, वहीं उनका बेटा जीतेंद्र सिंह आगरा परिक्षेत्रीय कार्यालय में कार्यरत है। कानून के जानकार होने के बावजूद इन्होंने इस खूनी साजिश को शह दी। जेल में बंद पिता-पुत्र ने कोर्ट से रिहाई के लिए जमानत की गुहार लगाई थी। लेकिन अभियोजन पक्ष की दलीलों और पुलिस के पुख्ता साक्ष्यों को आधार मानते हुए एडीजे राकेश वशिष्ठ की अदालत ने दोनों की जमानत अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया।

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