अलीगढ़। किस्मत और हालात की मारी जेल में बंदी एक महिला ने जब 10 साल बाद पति और बेटे की हत्या के आरोप से अदालत में खुद को निर्दोष साबित किया तो गत दिवस उसे बाइज्जत बरी करते समय अदालत में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। लेकिन गुजरा वक्त वापस नहीं लाया जा सकता था। अदालत ने महिला और उसके बेटे के बेेहतर भविष्य की कामना की और विश्वास दिलाया कि जिस जुर्म का उस पर आरोप था उसके असली गुनाहगारों को सजा जरूर मिलेगी।
महिला का मुकदमा लड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार वशिष्ठ ने बताया कि मामला है थाना जवां के गांव खेड़ा की रहने वाली कमलेश का। कमलेश अपने पति की दूसरी पत्नी थी। पहले पति से एक बेटा था। पति के पास 90 बीघा जमीन थी। कमलेश के अपने भी तीन बेटे थे। सौतेले बेटे को लगा कि जमीन उसकी सौतेली मां के बच्चों में बंट जाएगी। इसलिए कमलेश के एक बेटे की हत्या कर दी। प्रचारित किया कि उसकी आंधी में पेड़ गिरने से मौत हो गई है।
कुछ दिनों बाद सौतेले बेटे ने अपने पिता और कमलेश के दूसरे बेटे (मंझले बेटे) को मार दिया। इस मामले में मुकदमा सौतेले बेटे के खिलाफ दर्ज हुआ। लेकिन बाद में सौतेले बेटे ने अदालत में इस्तगासा (प्रतिवाद) दाखिल कर कमलेश को पति और बेटे की हत्या में आरोपी बना दिया। कमलेश का सबसे छोटा एकमात्र बचा बेटा उस समय दो साल का था। वह अपने बेटे के साथ ही जेल चली गई।
यह मुकदमा एडीजे पंचम की अदालत में चल रहा था। वक्त गुजरता गया। सुनवाई होती गई लेकिन कमलेश जेल में अपने ही पति और बेटे की हत्या का कलंक माथे पर लेकर जिंदा रही। करीब 10 साल बाद वह दिन भी आया जब कमलेश ने खुद को अदालत में बेगुनाह साबित कर दिया। अदालत ने कमलेश की सहनशीलता की सराहना की। साथ ही विश्वास दिलाया कि वह अपने एक मात्र बचे बेटे की बेहतर परवरिश करे। दोषियों को सजा जरूर मिलेगी।
इस मामले में अब सौतेले बेटे पर अपने पिता की हत्या का मुकदमा चल रहा है। जब कमलेश को अदालत ने बरी किया तो माहौल भावनात्मक हो गया। अदालत को उससे पूरी संवेदना थी। कमलेश के अदालत से यही शब्द थे इंसाफ की जीत हुई है। वह अपने बेटे को गुजरे वक्त की कालिख से दूर पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाएगी।