पिसावा क्षेत्र के गांव मरहला निवासी एक व्यक्ति की उधारी विवाद में अपहरण के बाद हत्या के दोषी दंपती को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे-5 ऋषि कुमार की अदालत से सुनाया गया है।
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी रविकांत शर्मा के अनुसार घटना 14 जून 2006 की है। गुमशुदगी मुकदमा 18 जून को गांव मरहला के अजीत द्वारा कराया गया। इसमें कहा गया कि उनके पिता हरवीर सिंह शाम को खाना खाने के बाद निकले, इसके बाद नहीं लौटे। गुमशुदगी सूचना पर पुलिस तलाश के दौरान मथुरा जनपद से खायरा कोठी रजवाहे में एक लाश मिलने की सूचना मिली, जिसकी पहचान हरवीर सिंह की लाश के रूप में हुई। बाद में पोस्टमार्टम व मुकदमा मथुरा से पिसावा ट्रांसफर हुआ और साक्ष्यों के आधार पर गांव के ही ओंकार सिंह, उनकी पत्नी कांती देवी के अलावा पड़ोसी गांव मीरपुर के खेमचंद्र के नाम उजागर हुए।
जांच में पाया कि ओंकार सिंह ने हरवीर से कुछ उधारी ले रखी थी। इसी विवाद में हरवीर की अगवा करने के बाद गला दबाकर हत्या कर दी गई और शव को मथुरा में फेंक दिया गया। चार्जशीट न्यायालय में दाखिल होने पर ट्रायल शुरू हुआ। सत्र परीक्षण के दौरान 17 जून 2016 को एक आरोपी खेमचंद्र की मृत्यु हो गई। न्यायालय में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दंपती ओंकार व कांती देवी को अपहरण व हत्या का दोषी माना गया, जिसके आधार पर उम्रकैद व 25-25 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।