टप्पल क्षेत्र में अलीगढ़-पलवल मार्ग के हजियापुर डेयरी हत्याकांड में 13 वर्ष बाद न्यायालय ने हिस्ट्रीशीटर भाइयों समेत तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया गया है। यह फैसला एडीजे-17 मनोज कुमार सिद्धू की अदालत से सुनाया गया है। प्रधान पद के चुनाव की तैयारी के बीच हिस्ट्रीशीटर भाइयों के एक भाई की हत्या के बदले यह हत्या होने का आरोप उस समय लगा था।
अभियोजन के अधिवक्ता एडीजीसी सुधांशु अग्रवाल के अनुसार घटना 25 जुलाई 2009 की है। टप्पल थाने में मुकदमा खैर के गांव जड़ाना की नगरिया के अजीत सिंह की ओर से दर्ज कराया गया था। इसमें आरोप लगाया कि वह अपने छोटे भाई अर्जुन (25) को नारायनपुर आश्रम से दवा दिलाकर बहन वीरेश के साथ लौट रहे थे। हजियापुर डेयरी पर बस से उतरते ही नामजद हमलावरों ने छोटे भाई अर्जुन को घेरकर हत्या करने के लिए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अर्जुन सड़क पर 100 मीटर तक बचने के लिए दौड़ा। बाद में गोली लगने से खेत में जाकर गिर गया। गिरने के बाद भी हमलावरों ने गोली मारीं और मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान वादी अजीत व उसकी बहन वीरेश को धमकाकर आरोपी चले गए।
आरोप के अनुसार हत्या में नामजद गांव हजियापुर के असलम व हनीफ उर्फ हिप्पी उर्फ हैप्पी के भाई ईदा की एक वर्ष पहले हत्या हुई थी। दोनों भाई यह मानते थे कि अर्जुन उस हत्या में शामिल रहा। इसी रंजिश में स्वयं उन दोनों भाइयों ने गांव के अलिया, पड़ोसी गांव तकीपुर के आस मोहम्मद, हमारे गांव के सिंकी ने मिलकर अर्जुन की हत्या को अंजाम दिया। दौरान-ए-जांच पुलिस ने पांचों नामजदों की गिरफ्तारी के बाद चार्जशीट दायर की। न्यायालय में लंबे समय तक चले सत्र परीक्षण के बाद साक्ष्यों व गवाही के आधार पर सगे भाई असलम व हनीफ उर्फ हैप्पी के अलावा उनके गांव के अलिया को दोषी पाया गया, जबकि आस मोहम्मद व सिंकी को बरी किया गया।
बुधवार को दोषी तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ में असलम व अलिया को 60-60 हजार व हनीफ को 65 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना राशि में से 80 फीसदी पीड़ित पक्ष को देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि न अर्थदंड न देने की दशा में इनकी संपत्ति से जुर्माना वसूला जाए और जिलाधिकारी को वसूली प्रमाण पत्र जारी किया जाए। सजा पाने वाले सगे भाई असलम व हनीफ टप्पल थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं।
25 जुलाई को हत्या और 25 जुलाई को ही दोषी करार
इस हत्याकांड के निर्णय में सबसे खास बात यह है कि यह हत्याकांड वर्ष 2009 की तारीख 25 जुलाई को हुआ था। अदालत ने हत्या के ठीक 13 वर्ष बाद वर्ष 2022 की 25 जुलाई यानि सोमवार को तीनों को दोषी करार दिया था।
प्रधानी की तैयारी के बीच हुई थी हत्या
इस हत्याकांड को लेकर गांव हजियापुर के सोनू प्रधान बताते हैं कि उनके गांव का मृत ईदा, असलम व हनीफ पुराने अपराधी रहे हैं। इन पर ईदा की हत्या से पहले अपहरण व अन्य तरह के अपराध दर्ज हुए थे। इसी बीच प्रधानी की तैयारी के क्रम में कुछ लोगों ने रंजिश मानते हुए ईदा की हत्या कराई, जिसमें गांव के दो लोग नामजद हुए। मगर ईदा के अपराधी भाई मृत अर्जुन को व खुद उनको इसका जिम्मेदार मानते थे। अर्जुन की हत्या के बाद असलम व हनीफ ने अन्य अपराध भी किए। इंस्पेक्टर टप्पल के अनुसार दोनों भाई हिस्ट्रीशीटर हैं, जिन पर हत्या आदि के कई अपराध दर्ज हैं।
गैर समुदाय की रंजिश में कई दिन तक रही थीं सुर्खियां
वर्ष 2009 में दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड में गैर समुदाय से जुड़ी रंजिश उजागर होने पर कई दिन तक सुर्खियां रही थीं और इलाके में तनाव का माहौल रहा था।