जिस कीमत पर आपको एक अच्छा बिस्कुट का पैकेट, बीड़ी, गुटका या सिगरेट तक नहीं मिलती, उस कीमत में अलीगढ़ में ताला मिल जाता है। जी हां, आसानी से यकीन तो नहीं होगा, लेकिन जबरदस्त महंगाई के इस दौर में अलीगढ़ में देश का सबसे सस्ता ताला बन रहा है, जिसकी कीमत लगभग पांच रुपये तक पड़ती है।
यह ताला साइज में छोटा और 10 से 15 मिमी मोटा होता है। इसकी कोई गारंटी नहीं मिलती है। इसके बाद सात, आठ से लेकर दस रुपये तक के ताले बहुतायत में बनते हैं। दस रुपये का ताला बड़ी संख्या में बनता है। इसका प्रयोग फर्नीचर और लोहे की अलमारियों में होता है। पांच से सात रुपये की कीमत वाले इन सस्ते तालों का प्रयोग बैग, ब्रीफकेस, हैंडबैग में होता है।
घर में बनने वाले छोटे-छोटे फर्नीचर में इसका प्रयोग होता है। शहर में ऊपरकोट, ख्वाजा चौक, भुजपुरा से लेकर तालानगरी तक इनका उत्पादन होता है। पांच रुपये के ताले का अगर पक्का बिल चाहिए तो लगभग 90 पैसे जीएसटी देना होता है। इसी तरह से दस रुपये के ताले में 1.80 रुपये जीएसटी देना होता है। ताले पर लगभग 18 फीसदी जीएसटी देय है।
उद्यमी चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि अलीगढ़ में मांग के अनुसार ताला बनाने का रिवाज बहुत पुराना है। यहां पांच से दस रुपये की रेंज में कई ताले बनते हैं। सप्लाई भी होते हैं। उद्यमी मुकेश लिम्का ने बताया कि पांच से दस रुपये के ताले अक्सर दर्जन के अनुसार बेचे जाते हैं। ग्राहक की मांग के अनुसार इनको बनाया जाता है। अभी भी ऑर्डर आते हैं। अलीगढ़ मेटल मर्चेंट एसोसिएशन संजय वार्ष्णेय ने बताया कि लोहे के दामों में बीते कुछ महीनों में बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव नहीं हुआ है। ऐसे में ताला उद्योग को राहत है।