जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदार और उनके समर्थक इस वक्त तनाव के चरम पर हैं। ये तनाव हार-जीत और पूर्ण बहुमत जुटाने को लेकर है। आज होने जा रही मतगणना ने इसको और बढ़ा दिया है। शाम तक परिणाम सामने होंगे। भाजपा से विजय देवी, बसपा से प्रेमलता विमल, सपा-महान दल से अर्चना यादव और निर्दलीय चौ. सुधीर सिंह के खेमे में ये तनाव सर्वाधिक है। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी की लड़ाई इन्हीं के बीच हो रही है। अब इस लड़ाई में बहुमत किस को मिलता है...? यह देखना दिलचस्प होगा।
भाजपा में अंदरखाने बहुमत को लेकर सर्वाधिक उठापटक मची है। हर हाल में बहुमत जुटाने को लेकर पार्टी आक्रामक भी हो सकती है। जिला पंचायत में 27 सदस्यों के समर्थन वाला ही अध्यक्ष बनेगा। इसलिए ये संख्या जुटाना सत्तारूढ़ दल के लिए फिलहाल आसान नहीं दिख रहा है। कमोबेश, बसपा और सपा के लिए भी स्थितियां बहुत अनुकूल नहीं है। ऐसे में सभी दलों की नजरें उन निर्दलीयों पर भी लगी हैं, जिनकी स्थिति मतदान के दिन से मजबूत बताई जा रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के सभी दावेदारों के रणनीतिकार निर्दलीयों के संपंर्क में हैं। किसी तरह से मतगणना से पहले या उस दौरान तक समर्थन जुटाया जा सके और जल्द जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अध्यक्ष पद की दावेदारी ठोकी जा सके।
माना जा रहा है कि मतगणना के बाद रविवार देर शाम तक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल, सभी खेमों से पूरे जिले के जिला पंचायत के सशक्त उम्मीदवारों की पूछ बढ़ गई है। उनको हर तरफ से लुभावने ऑफर भी पेश किए जा रहे हैं। सत्तारूढ़ दल के नेताओं से लेकर विपक्ष तक सभी इसी में जुटे हैं।
ब्लॉक प्रमुख पदों पर भी उठापटक शुरू
जिले के 12 ब्लाकों में प्रमुख बनने के लिए भी उठापटक शुरू हो गई है। बीडीसी के परिणाम आने और उसके बाद समर्थन जुटा कर प्रमुख बनने के इच्छुक कई नेता इस जुगाड़ में लग गए हैं। मतगणना के बाद ये जोर आजमाइश और बढ़ जाएगी।
ब्लाक प्रमुख पदों पर पार्टी स्तर से भी दल जुटे हैं और निर्दलीय मैदान में उतरे कई नेता भी प्रबल दावेदार हैं। लोधा, धनीपुर, मडराक और जवां ब्लाक को लेकर सरगर्मी सबसे ज्यादा है, क्योंकि ये शहरी सीमा के आसपास के प्रमुख ब्लाक हैं। जिससे नेता अपना राजनीतिक सफर आगे बढ़ाते आए हैं।