सरकार के नुमाइंदे की वो बात रामश्री कभी नहीं भूल सकतीं। 300 रुपये दो वरना पेंशन बंद करा दूंगा। 3 साल बीत गए, सरकार के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में रामश्री तभी से मृतक के रूप में दर्ज हैं। बेचारी रामश्री तभी से हर अफसर के सामने अपने जीवित होने का प्रमाण देती आ रही हैं। सत्यापन रिपोर्ट भी उनके हक में है। लेकिन आज तक बंद पेंशन शुरू नहीं हो सकी और न ही दोषी को दंड मिला। महज 300 रुपये प्रति माह पेंशन की ऐसी कीमत चुका रही हैं रामश्री देवी।
यह है मामला
गभाना के टमकौली क्षेत्र के गांव परतापुर निवासी रामश्री देवी पत्नी स्व राजवीर के पति 1993 में ही गुजर गए थे। उन्हें किसी ने बताया ही नहीं कि पेंशन भी मिलती है। 2015 में पता लगा तो आवेदन कर दिया। पेंशन शुरू भी हो गयी। पीड़ित ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा कि उन्हें विधवा पेंशन मिल रही थी। लेकिन एक दिन सचिव अरविंद ने पेंशन के एवज में पैसे मांगे। रामश्री के पास पैसे नहीं थे, इसलिये मना कर दिया। गुस्साए सचिव ये कहकर चले गए कि पेंशन बंद करा दूंगा। उसके बाद फिर कभी पेंशन नहीं मिली। पता किया तो जानकारी हुई कि 24 अक्टूबर 2018 से पेंशन सॉफ्टवेयर पर रामश्री देवी मृतक के रूप में दर्ज हैं। उन्होंने डीएम से सचिव के विरुद्ध कार्यवाही और पेंशन दिलाने की मांग की।
बीडीओ से एसडीएम तक सबने दौड़ाया
पीड़ित ने हर स्तर पर शिकायतें की। कभी लेखपाल ने सत्यापन किया कभी बीडीओ से कराया गया। डीएम ने एसडीएम को भी जिम्मेदारी दी। एसडीएम ने समाज कल्याण विभाग जाकर निस्तारण कराने की सलाह दे दी। जबकि विधवा पेंशन को जिला प्रोबेशन अधिकारी देखते हैं।
मृत बाबू के सिर मढ़ दिया मामला
ऑनलाइन शिकायत में जब जिला प्रोबेशन अधिकारी डीएम को जवाब देने के लिए मजबूर हो गए तब उन्होंने पीड़ित को पेंशन का पात्र बताते हुए महिला को मृतक दर्ज करने का ठीकरा कार्यालय के उन बाबू अमर सिंह के सिर मढ़ दिया जिनकी मार्च 2018 में ही मृत्यु हो चुकी है। यानी जब दोषी ही नहीं है तो कार्यवाही किस पर होगी।
27 वर्ष में पेंशन के 1800 रुपये ही मिले
रामश्री देवी के पति राजवीर सिंह 1993 में ही स्वर्गवासी हो गए थे। योजनाओं का जिम्मेदार इतना बड़ा सरकारी अमला 24 साल तक उन तक पहुंच ही नहीं सका। जब 2015 में उन्हें पेंशन मिलनी शुरू हुई तो 8 माह बाद ही रिश्वत की डिमांड हो गयी। लेखपाल मुकेशपाल सिंह की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि उन्हें 8 माह में सिर्फ 1800 रुपये पेंशन के मिले हैं। उसके बाद 24 अक्टूबर 2015 से ही उन्हें मृतक दर्शाकर पेंशन बंद करा दी गयी। जबकि वे जिंदा हैं। अपनी रिपोर्ट में लेखपाल ने ये भी कहा कि रामश्री विधवा पेंशन के लिए पात्र हैं, उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हैं।
अब नए सिरे से मिलेगी पेंशन
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि रामश्री को अब नए सिरे से पेंशन मिलेगी। उन्हें नए सिरे से सभी कागजातों के साथ आवेदन करना होगा। वह कलक्ट्रेट स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय या निकटतम लोकवाणी केंद्र से आवेदन कर सकती हैं। पुरानी पेंशन को बहाल करने में अफसर इसलिए बच रहे हैं कि सॉफ्टवेयर में जिस पेंशन नंबर पर लाभार्थी मृतक दर्ज है उसे अब जीवित कैसे लिखें। उसमें कई सवाल के जवाब देने पड़ जाएंगे। साथ ही पुरानी पेंशन को बहाल करने पर 24 अक्टूबर 2015 से अब तक पेंशन का पूरा पैसा भी देना होगा।
जिले में पेंशनरों की संख्या
-विधवा पेंशनर-23500
-वृद्घा पेंशनर-41000
-दिव्यांग पेंशनर-14500